नई दिल्ली, 8 अगस्त। देश के विभिन्न न्यायाधिकरणों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया को नया रूप देने की तैयारी है। केंद्र सरकार अगले सप्ताह लोकसभा में एक नया विधेयक पेश करने जा रही है, जिसके तहत न्यायाधिकरणों के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन के लिए एक स्वतंत्र आयोग बनाया जाएगा। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया जा रहा है।
राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग का गठन
प्रस्तावित विधेयक में राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग बनाने का प्रावधान रखा गया है, जिसका मुख्यालय राष्ट्रीय राजधानी में होगा। इस आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे, जिनमें एक अध्यक्ष के अलावा दो न्यायिक सदस्य और दो तकनीकी सदस्य शामिल होंगे। सरकार का कहना है कि इस विधेयक के जरिए न्यायाधिकरणों में नियुक्तियों को अधिक दक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र बनाने की कोशिश की जा रही है, साथ ही अलग-अलग न्यायाधिकरणों में नियुक्ति मानकों में एकरूपता भी लाई जाएगी।
अध्यक्ष पद के लिए यह होगी पात्रता
प्रस्तावित आयोग के अध्यक्ष पद के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश को पात्र माना जाएगा। लोकसभा सदस्यों को सौंपे गए विधेयक की प्रति में इसका उल्लेख है। विधेयक में यह भी बताया गया है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2021 के कुछ प्रावधानों को निरस्त कर दिया था। अदालत ने इन प्रावधानों को शक्तियों के बंटवारे और न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के खिलाफ बताया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि ये प्रावधान न्यायाधिकरणों में नियुक्ति, कार्यकाल और कामकाज से जुड़े मानकों को लेकर पहले दिए गए फैसलों से मेल नहीं खाते।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विधेयक
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही एक स्वतंत्र और पेशेवर विशेषज्ञता वाले राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन का निर्देश दिया था। अदालत के मुताबिक इस आयोग को न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों के चयन तथा नियुक्ति के लिए पारदर्शी और निगरानी युक्त व्यवस्था अपनानी होगी। नया विधेयक कानून बनते ही मौजूदा न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2021 खत्म हो जाएगा।
इस नए कानून से निम्न बदलाव आने की उम्मीद है:
- नियुक्तियां अधिक पारदर्शी और स्वतंत्र होंगी
- सभी न्यायाधिकरणों में नियुक्ति मानकों में एकरूपता आएगी
- चयन प्रक्रिया की निगरानी के लिए स्थायी व्यवस्था बनेगी
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा बताई गई शक्तियों के पृथक्करण की खामी दूर होगी


