रांची, 11 अगस्त। झारखंड में जेपीएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को विधानसभा में बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार गंभीर है और जेपीएससी पीटी व जेएसएससी से जुड़े मामलों की जांच कराई जा रही है।
जेपीएससी परीक्षाएं होंगी रद्द
सदन में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 14वीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा के साथ-साथ वर्ष 2023 और 2025 में जेपीएससी द्वारा कराई गई परीक्षाओं को रद्द किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षा, एफआरओ, एपीपी तथा टीडीपीएल द्वारा आयोजित परीक्षाओं की भी जांच का ऐलान किया। इस घोषणा के बाद जेएसएससी सीजीएल परीक्षा भी जांच के घेरे में आ गई है, क्योंकि इसका आयोजन भी टीडीपीएल ने ही कराया था। विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में बड़े स्तर पर सुधार की जरूरत है और सरकार इस दिशा में अहम कदम उठाने जा रही है।
विशेषज्ञों से लिया सुझाव
मुख्यमंत्री ने बताया कि परीक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से भी सलाह लेगी। इसके लिए आईआईटी, आईआईएम और एक्सएलआरआई जैसे बड़े शैक्षणिक व प्रबंधन संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस फैसले को जेपीएससी-जेएसएससी विवाद के बीच सरकार के अब तक के सबसे बड़े कदमों में गिना जा रहा है। इस फैसले का असर दो तरह से देखा जा रहा है, एक तरफ कई अभ्यर्थी इसे राहत के रूप में देख रहे हैं, तो दूसरी तरफ जिनकी परीक्षा रद्द हुई है, वे अब यह जानना चाहते हैं कि आगे की प्रक्रिया क्या होगी और नई परीक्षा कब आयोजित की जाएगी।
एक्स पोस्ट में मांगे सुझाव
विधानसभा में घोषणा के अलावा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी एक पोस्ट साझा की। उन्होंने बताया कि छात्रों की बात, छात्रों के साथ अभियान के तहत अब तक झारखंड के 8,500 से अधिक युवाओं ने परीक्षा व्यवस्था सुधारने को लेकर अपने सुझाव दिए हैं। उनके मुताबिक ओएमआर शीट, परीक्षा कैलेंडर, स्कोरकार्ड, प्रश्नपत्र, परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, तकनीक के बेहतर इस्तेमाल तथा दोनों आयोगों में संवैधानिक दायरे के भीतर जरूरी सुधारों से जुड़े कई अहम सुझाव मिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने लिखा कि उनका मकसद सिर्फ समस्याओं पर चर्चा करना नहीं, बल्कि मौजूदा चुनौतियों का समाधान करते हुए ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाना है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए पारदर्शी, निष्पक्ष, सुरक्षित और जवाबदेह हो। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने सुझाव देना जारी रखें, क्योंकि यह सुधार सिर्फ सरकार का प्रयास नहीं बल्कि युवाओं की जनभागीदारी से होने वाला बदलाव होगा।

