गाज़ीपुर। मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश के विरोध में सोमवार दोपहर समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। सपा अल्पसंख्यक सभा के जिलाध्यक्ष तौकीर खां की अगुवाई में हुए इस प्रदर्शन में नायब तहसीलदार ज्योति सिंह को राज्यपाल के नाम संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में ध्वस्तीकरण के आदेश को तत्काल वापस लेने और शिक्षा संस्थान को संरक्षित रखने की मांग की गई।
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ध्वस्तीकरण का आदेश विवाद में
सपा अल्पसंख्यक सभा के जिलाध्यक्ष तौकीर खां ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय का निर्माण उस समय हुआ था जब संबंधित क्षेत्र ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता था। उस समय यह इलाका नगर निकाय की सीमा में नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि निर्माण के बाद लागू हुए नियमों के आधार पर ध्वस्तीकरण का आदेश किस आधार पर दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई तकनीकी खामी है तो न्यायिक प्रक्रिया अपनाकर विधि सम्मत तरीके से उसे दूर किया जाना चाहिए ताकि शिक्षा और छात्रों का हित हो सके।
सपा नेता समीर सिंह ने ध्वस्तीकरण के आदेश की कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि 38 भवनों को गिराने का आदेश किस कानून के तहत जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित कानून भवन निर्माण के बाद लागू हुआ है तो ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले में न्यायपालिका पर भरोसा भी जताया।
शिक्षा पर हमले का आरोप
सपा नेता आमिर अली ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। विश्वविद्यालय में आज भी करीब 20 प्रतिशत विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा दी जाती है। उन्होंने कहा कि निर्माण के समय यह क्षेत्र नगर निकाय की सीमा में नहीं था इसलिए अब उसे अवैध बताकर कार्रवाई करना उचित नहीं है।
तौकीर खां ने कहा कि यह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई छात्रों और नौजवानों पर कुठाराघात है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण शिक्षा संस्थान है और इसे राजनीतिक और वैचारिक विरोध के आधार पर निशाना बनाना उचित नहीं है। सपा ने राज्यपाल से हस्तक्षेप कर शिक्षा संस्थान को संरक्षित रखने की मांग की।
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चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा
ज्ञापन में सपा ने चार प्रमुख मांगें रखीं। पहली — जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश तत्काल वापस लिया जाए। दूसरी — शिक्षा संस्थान को संरक्षित रखा जाए। तीसरी — यदि कोई तकनीकी खामी है तो न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से विधि सम्मत तरीके से उसे दूर किया जाए। चौथी — गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जाए। प्रदर्शन में पूर्व जिलाध्यक्ष रामधारी यादव, रणजीत यादव, आमिर अली, मदन यादव, अकबर अहमद, डॉ. समीर सिंह, अमित ठाकुर सहित पार्टी के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

