गाज़ीपुर। सोशल मीडिया पर हथियार लहराकर और गैंग के नाम से रौब गांठकर दहशत फैलाने वालों पर गाज़ीपुर पुलिस ने डिजिटल चोट की है। पुलिस ने ऐसे 250 सोशल मीडिया अकाउंट चिन्हित कर उन्हें बंद कराए गए। पुलिस का साफ संदेश है कि इंटरनेट पर अपराध का महिमामंडन करने वालों को किसी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
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निगरानी अभियान में पकड़ में आए संदिग्ध अकाउंट
यह कार्रवाई वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा के निर्देशन में चल रहे निगरानी अभियान का हिस्सा है। इसके तहत पुलिस लगातार अलग-अलग सोशल मीडिया मंचों पर नजर बनाए हुए है।
जांच में सामने आया कि कई अकाउंट ऐसे थे, जिनके जरिए आपराधिक प्रवृत्ति के लोग अलग-अलग नामों से गैंग बनाकर युवाओं को बरगला रहे थे। इन खातों पर समूह में मोटरसाइकिल दौड़ाने, सार्वजनिक जगहों पर हुड़दंग मचाने और अवैध हथियारों के साथ फोटो-वीडियो डालने जैसी गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही थीं। पुलिस के मुताबिक ऐसी सामग्री आमजन में भय और असुरक्षा का माहौल बना रही थी।
इन अकाउंटों की गहन पड़ताल और सत्यापन के बाद संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को रिपोर्ट भेजी गई। इसके बाद सभी 250 अकाउंट हटा दिए गए। पुलिस ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे खातों पर पैनी नजर रखी जाएगी और विधिक कार्रवाई का सिलसिला जारी रहेगा।
‘गैंगस्टर इमेज’ बनाना पड़ सकता है भारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ तस्वीरें डालना, गैंग के नाम से खाता बनाना, धमकी भरे वीडियो पोस्ट करना या अपराधियों का महिमामंडन करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे मामलों में आईटी एक्ट और अन्य कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई संभव है।
अधिकारियों ने युवाओं को खास तौर पर आगाह किया है। उनका मानना है कि लाइक और फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ में कुछ युवा खुद को अपराधी जैसी छवि में पेश करने की कोशिश करते हैं। पुलिस ने साफ किया कि सोशल मीडिया पर डाली गई हर पोस्ट निगरानी के दायरे में हो सकती है और उसका कानूनी खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है।
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आम लोगों से सहयोग की अपील
इस मुहिम में पुलिस ने आम नागरिकों को भी जोड़ा है। यदि किसी को सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक, भ्रामक, अवैध या अपराध को बढ़ावा देने वाली कोई पोस्ट, वीडियो या अकाउंट दिखे, तो वह इसकी सूचना सीधे पुलिस तक पहुंचा सकता है।
इसके लिए पुलिस सतर्क मित्र चैटबॉट नंबर 7839860411 जारी किया गया है। इस नंबर पर मिली सूचनाओं पर समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का माध्यम है, अपराध और दहशत फैलाने का जरिया नहीं। कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

