गाज़ीपुर। यूनियन ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) गाज़ीपुर में बुधवार को 6 दिवसीय मसाला निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद ने माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया और कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। इस प्रशिक्षण में स्वयं सहायता समूहों की 30 महिला सदस्याओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है।
उद्घाटन के अवसर पर जिला विकास अधिकारी राजन राय, डीसी एनआरएलएम विजय कुमार यादव, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय प्रमुख विनय शंकर, अग्रणी जिला प्रबंधक राजदेव कुमार और आरसेटी निदेशक संजय सिंह भी मौजूद रहे।
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मसाला निर्माण प्रशिक्षण
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी छह दिनों तक संचालित होगा। इस दौरान प्रतिभागी महिलाओं को मसाला निर्माण की व्यावहारिक विधियां, पैकेजिंग तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, बाजार में उत्पाद बेचने के तरीके और व्यवसाय प्रबंधन की बारीकियां सिखाई जाएंगी। लक्ष्य यह है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाएं खुद का उद्यम शुरू कर सकें और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकें।
आरसेटी निदेशक संजय सिंह ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा — “यूनियन आरसेटी का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षुओं को सफल उद्यमी के रूप में स्थापित करना है। ग्रामीण महिलाओं में अपार संभावनाएं हैं — सही मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता मिले तो वे स्थानीय स्तर पर बड़े बदलाव की वाहक बन सकती हैं।”
डीसी एनआरएलएम विजय कुमार यादव ने महिलाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी और कहा कि मिशन का मूल उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है।
महिला सशक्तिकरण पर जोर
मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद ने कहा — “स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वरोजगार के क्षेत्र में नई पहचान बना सकती हैं। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है।” उन्होंने कहा कि कौशल विकास और स्वरोजगार के जरिए महिलाएं न केवल अपने घर की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी अपना योगदान दे सकती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने और अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ने का आह्वान किया।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय प्रमुख विनय शंकर ने कहा कि बैंक ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन देने के लिए सदैव तत्पर है। प्रशिक्षण से जुड़े हुनर को व्यवसाय का रूप देकर महिलाएं सम्मानजनक आय अर्जित कर सकती हैं।
अग्रणी जिला प्रबंधक राजदेव कुमार ने कहा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। बैंकिंग सेवाओं, ऋण सुविधाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएं सफल उद्यमी बन सकती हैं और अपने क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती हैं।
जिला विकास अधिकारी ने महिलाओं के उत्साह और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि दृढ़ निश्चय और परिश्रम के साथ आगे बढ़ने वाली महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं।
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अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों का निरीक्षण
उद्घाटन समारोह के बाद अतिथियों ने आरसेटी में पहले से संचालित एसी/रेफ्रिजरेटर मरम्मत और महिला परिधान निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी निरीक्षण किया। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं और महिलाओं से संवाद कर उनकी प्रगति की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने सभी प्रशिक्षणार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कौशल विकास ही आत्मनिर्भरता की सबसे मजबूत नींव है।
कार्यक्रम का संचालन संस्थान के संकाय सदस्यों ने किया। इस अवसर पर संकाय मुकेश श्रीवास्तव, कार्यालय सहायिका इल्मा नूर, शिवांगी मौर्या और संस्थान के अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।

