गाज़ीपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को मुहम्मदाबाद की जनसभा में गाज़ीपुर की ऐतिहासिक और सैन्य विरासत का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गाज़ीपुर की धरती 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक देश की रक्षा में सदैव अग्रणी रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद का उल्लेख रामायण कालखंड से मिलता है और यह भगवान परशुराम और महर्षि जमदग्नि का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसे लहुरी काशी भी कहा जाता है।
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एशिया का सबसे बड़ा गांव
मुख्यमंत्री ने गहमर गांव का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह एशिया का सबसे बड़ा गांव है। अकेले इस एक गांव में 12,000 से अधिक सैनिक और सेना अधिकारी निवास करते हैं। इसके अलावा 15,000 से अधिक सेवानिवृत्त सैनिक और सेना अधिकारी भी यहीं रहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी देश की सीमाओं की रक्षा की बात आती है तो गाज़ीपुर के फौजियों का योगदान अविस्मरणीय रहा है।
1948 में कबीलाई हमले से लेकर 1962, 1965, 1971 के युद्धों और 1999 के कारगिल युद्ध तक गाज़ीपुर के रणभंकरों ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। गत वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी गाज़ीपुर के जवानों ने देश की रक्षा में अपना योगदान दिया। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीर मेघर सिंह का नाम सुनकर अंग्रेजों की रूह कांपती थी, वे इसी धरती के थे।
वीर अब्दुल हमीद और शहीद रामउग्रह पांडेय
मुख्यमंत्री ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान के पेटेंट टैंकों को ध्वस्त करने वाले परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह वीर इसी गाज़ीपुर की धरती के थे। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपना शौर्य दिखाने वाले शहीद रामउग्रह पांडेय को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया, वे भी इसी पावन धरा से थे।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में गाज़ीपुर के दर्जनों युवाओं ने भाग लेकर देश की आजादी में योगदान दिया था। डॉ. शिव पूजन राय और भगवत मिश्र जैसे स्वाधीनता सेनानियों ने भी गाज़ीपुर की धरती को गौरवान्वित किया।
साहित्य में भी गाज़ीपुर अग्रणी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैन्य विरासत के साथ-साथ गाज़ीपुर का साहित्यिक योगदान भी अतुलनीय है। हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित ललित निबंधकार और विद्वान श्री कुबेरनाथ राय गाज़ीपुर की धरती के थे। गोपाल राम गहमरी जिन्हें गहमरी बाबू के नाम से जाना जाता है उन्होंने 200 से अधिक उपन्यास लिखे। उन्होंने पूछा कि इतनी गौरवशाली विरासत वाला यह जनपद क्यों गुमनाम होता गया और इसकी पहचान का संकट किसने खड़ा किया।
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राष्ट्र नायकों को सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और सपा ने महाराज सुहेलदेव के नाम पर कोई आयोजन नहीं होने दिया जबकि सालार मसूद गाजी का मेला लगवाते रहे। उनकी सरकार ने बहराइच में महाराज सुहेलदेव की भव्य प्रतिमा स्थापित की है। उनके नाम पर मेडिकल कॉलेज और डाक टिकट भी जारी किया गया। सुहेलदेव सुपरफास्ट ट्रेन गाज़ीपुर से आनंद विहार के बीच चलाई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो देश और समाज अपने राष्ट्र नायकों को सम्मान देता है वही आगे बढ़ता है।


