📌 कृष्ण मणि त्रिपाठी
देवरिया। उत्तर प्रदेश मिलेट्स (श्री अन्न) पुनरोद्धार कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद के बैतालपुर स्थित कृषि विभाग भवन में विकास खंड स्तरीय कृषक प्रशिक्षण एवं गोष्ठी का आयोजन किया गया। वाराणसी से आए कृषि विभाग के वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप और डॉ. विनय मौर्या ने किसानों को मोटे अनाज की खेती की जानकारी दी। भाजपा किसान मोर्चा के मंडल महामंत्री विकाश मणि त्रिपाठी “अमित” मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मिलेट्स क्यों जरूरी हैं
डॉ. प्रदीप ने किसानों को बताया कि मिलेट्स यानी मोटे अनाज में ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो और सांवा जैसी फसलें आती हैं। ये फसलें प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कैल्शियम से भरपूर होती हैं। उन्होंने बताया कि गेहूं और धान की तुलना में मोटे अनाज में पोषण कहीं अधिक होता है। बाजरे में आयरन की मात्रा अधिक होने से यह खून की कमी से बचाता है जबकि रागी में कैल्शियम की मात्रा इतनी अधिक होती है कि यह हड्डियों को मजबूत बनाता है।
डॉ. विनय मौर्या ने बताया कि मिलेट्स के नियमित सेवन से मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है। उन्होंने कहा कि शहरों में अब स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग मोटे अनाज से बने उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिससे बाजार में मांग तेजी से बढ़ रही है।
कम लागत अधिक उत्पादन
डॉ. प्रदीप ने किसानों को बताया कि मिलेट्स की खेती धान और गेहूं की तुलना में कहीं कम खर्चीली है। जहां धान को 600 से 1200 मिलीमीटर पानी की जरूरत होती है वहीं मोटे अनाज मात्र 350 से 500 मिलीमीटर पानी में ही अच्छी पैदावार देते हैं। इनकी फसल 70 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है जबकि धान और गेहूं को 120 से 150 दिन लगते हैं। इससे किसान एक ही खेत में साल में दो बार फसल ले सकते हैं। रासायनिक खाद और कीटनाशक का खर्च भी गेहूं-धान की तुलना में काफी कम रहता है क्योंकि मिलेट्स में कीट कम लगते हैं।
डॉ. विनय मौर्या ने बताया कि पूर्वांचल की जलवायु और मिट्टी मोटे अनाज की खेती के लिए पूरी तरह अनुकूल है। कम उपजाऊ और बंजर जमीन पर भी मिलेट्स की अच्छी पैदावार हो सकती है। उन्होंने बाजरे की HHB 67 किस्म की विशेष रूप से सिफारिश की जो उत्तर प्रदेश के लिए उपयुक्त है और मात्र 65 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है।
सरकार की योजनाएं और लाभ
मुख्य अतिथि विकाश मणि त्रिपाठी “अमित” ने किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित किया गया था। इसी के अनुरूप उत्तर प्रदेश सरकार ने मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम शुरू किया है। इस योजना के तहत किसानों को उन्नत बीज, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और मोटे अनाज की खेती को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जो किसान मिलेट्स की खेती शुरू करना चाहते हैं वे कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क कर अनुदान पर बीज प्राप्त कर सकते हैं।
सैकड़ों किसानों की भागीदारी
कार्यक्रम की अध्यक्षता संजय सिंह ने की। इस अवसर पर अनिल तिवारी, सत्यप्रकाश मणि, गंगेश मणि, जयराम यादव और मेवालाल पटेल उपस्थित रहे। सैकड़ों किसानों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया और वैज्ञानिकों से सीधे सवाल पूछे। उपस्थित किसानों ने मिलेट्स की खेती के बारे में अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं और वैज्ञानिकों ने हर सवाल का विस्तार से जवाब दिया। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने इस आयोजन को उपयोगी बताया और भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की मांग की।


