नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की द्विमासिक बैठक आज 3 जून 2026 से शुरू हो गई है। यह बैठक 5 जून तक चलेगी और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को सुबह 10 बजे नीतिगत फैसले की घोषणा करेंगे। इसके बाद दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब होर्मुज संकट, महंगा तेल, कमजोर रुपया और बढ़ती महंगाई ने RBI के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
क्या है वर्तमान रेपो रेट
दिसंबर 2025 में आरबीआई ने आखिरी बार रेपो रेट 25 आधार अंक घटाकर 5.25% किया था। फरवरी 2025 से अब तक कुल 125 आधार अंक की कटौती हो चुकी है। अप्रैल 2026 की बैठक में भी रेट अपरिवर्तित रखा गया। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट 5.5% पर बना हुआ है। नीतिगत रुख “न्यूट्रल” बनाए रखा गया है।
इस बार क्यों है बैठक खास
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक हालात बेहद अनिश्चित हैं। अमेरिका-ईरान तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है जिससे ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर के पार निकल गया है। भारत अपनी जरूरत का 88-89% तेल बाहर से मँगाता है — इसलिए यह सीधे घरेलू महंगाई पर असर डालता है। रुपया 96.96 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया है। SBI रिसर्च का अनुमान है कि आने वाली कई तिमाहियों में महंगाई 5% से ऊपर बनी रह सकती है।
आर्थिक आँकड़े — मिली-जुली तस्वीर
एक तरफ CPI महंगाई अभी 3.48% पर है जो RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे है — यह राहत की बात है। लेकिन दूसरी तरफ थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और ईंधन की बढ़ती कीमतें आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई बढ़ाने का संकेत दे रही हैं। FY2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.9% है — विकास की गति मजबूत है पर वैश्विक अनिश्चितता के कारण चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। फरवरी 2025 से अब तक RBI 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर चुका है — अब rate कटौती की गुंजाइश कम है और बढ़ोतरी की आशंका ज्यादा।
रेट बढ़ेंगे या नहीं — क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ
अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में रेपो रेट अपरिवर्तित रहेंगे। कोटक महिंद्रा एएमसी (Kotak Mahindra AMC) के फिक्स्ड इनकम प्रमुख अभिषेक बिसेन का कहना है कि आरबीआई रेपो रेट 5.25% पर बनाए रखेगा लेकिन हॉकिश टोन (hawkish tone) अपनाते हुए मुद्रास्फीति अनुमान (inflation forecast) बढ़ा सकता है। आईसीआरए (ICRA) की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा — “हमें नहीं लगता कि MPC जल्द ही ब्याज दर वृद्धि करेगी।” हालाँकि अगर महंगाई लंबे समय तक ऊँची रही तो दिसंबर 2026 में ब्याज दर वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इंडोनेशिया, फिलीपींस और श्रीलंका जैसे तेल आयातक देश पहले ही रेट बढ़ा चुके हैं — इससे भारत पर भी दबाव बढ़ रहा है।
आम आदमी पर क्या असर
अगर ब्याज दर अपरिवर्तित रहती है — राहत — होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI नहीं बढ़ेगी। अगर ब्याज दर बढ़ती है — झटका — लाखों कर्जदारों की EMI बढ़ जाएगी और नए लोन महंगे होंगे। FD निवेशकों के लिए ब्याज दर बढ़ना फायदेमंद होगा — बेहतर रिटर्न मिलेंगे। SBI रिसर्च का कहना है कि फिलहाल EMI में राहत की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। 5 जून को सुबह 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की घोषणा के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी।

