नई दिल्ली। एक तरफ मध्य पूर्व में जंग की आग, दूसरी तरफ होर्मुज जलमार्ग बंद होने का संकट — इन दोनों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मई 2026 में करीब 12 अरब डॉलर यानी लगभग 1.14 लाख करोड़ रुपये का सोना बेच दिया। यह चौंकाने वाला खुलासा वैश्विक वित्तीय समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स ने 2 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट में किया। रिपोर्ट के अनुसार RBI ने यह कदम रुपये को गिरने से बचाने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रखने के लिए उठाया। साथ ही रैपिडन एनर्जी ग्रुप ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य अगस्त तक बंद रहा तो 2008 जैसी वैश्विक महामंदी का खतरा पैदा हो सकता है। स्थिति इतनी गंभीर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील करनी पड़ी।
ब्लूमबर्ग ने कैसे लगाया यह अनुमान?
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के वरिष्ठ भारत अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि 22 मई 2026 तक के दो हफ्तों में RBI के सोने के भंडार का मूल्य अचानक घट गया। यह तब हुआ जब सरकार ने सोने पर आयात शुल्क बढ़ाया था — जिससे सामान्यतः सोने के भंडार का मूल्य बढ़ना चाहिए था, घटना नहीं। इसी विरोधाभास को देखकर अभिषेक गुप्ता ने अपनी रिपोर्ट में लिखा — “यह दर्शाता है कि RBI सोना बेच रहा था।” इसी अवधि में RBI ने 7.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ भी जोड़ीं। RBI ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट
Outlook Money की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2026 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया था। लेकिन पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद कुछ ही हफ्तों में इसमें 47 अरब डॉलर से अधिक की गिरावट आ गई। 22 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में भंडार 7.51 अरब डॉलर घटकर 681.38 अरब डॉलर रह गया। इस हफ्ते अकेले सोने के भंडार में 4.53 अरब डॉलर की गिरावट आई। यह गिरावट डॉलर की मजबूती, विदेशी निवेशकों की भारी निकासी और रुपये को संभालने के लिए RBI के हस्तक्षेप की वजह से हुई। श्रीलंका का उदाहरण सबके सामने है — जहाँ विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने पर देश गंभीर आर्थिक संकट में डूब गया था। भारत की स्थिति अभी नियंत्रण में है — पर यह गिरावट चेतावनी की घंटी है।
क्यों बेचना पड़ा सोना — असली वजह
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक देश है और अपनी जरूरत का करीब 88-89% तेल विदेशों से खरीदता है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना हुआ है। फरवरी 2026 के अंत से अब तक तेल की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गया है। दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर हो गया। इसका सीधा असर यह हुआ कि भारत जितना कमा रहा है उससे कहीं ज्यादा खर्च कर रहा है — और यह अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। 20 मई 2026 को रुपया 96.96 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँच गया।
मोदी की अपील — सोना मत खरीदो
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि 11 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद देशवासियों से अपील करनी पड़ी। उन्होंने घरों को एक साल के लिए सोने की खरीदारी टालने, ईंधन की खपत कम करने और work-from-home अपनाने को कहा। भारत 700-800 टन सोने की वार्षिक माँग वाला देश है — जिसमें से 90% से अधिक आयात होता है। FY 2025-26 में सोने का आयात 72 अरब डॉलर तक पहुँच गया। सरकार ने सोने और चाँदी पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है।
होर्मुज बंद रहा तो महामंदी का खतरा
रैपिडन एनर्जी ग्रुप के संस्थापक और पूर्व व्हाइट हाउस ऊर्जा सलाहकार बॉब मैकनेली ने 21 मई 2026 को गंभीर चेतावनी जारी की। उनके अनुसार अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अगस्त तक बंद रहा तो 2008 जैसी वैश्विक महामंदी का जोखिम पैदा हो जाएगा। होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है — वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% इसी रास्ते से गुजरता है। फर्म का अनुमान है कि जलडमरूमध्य जुलाई में खुल सकता है। यदि ऐसा हुआ तो ब्रेंट क्रूड 130 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। JPMorgan ने चेताया है कि होर्मुज संकट जारी रहा तो तेल 150 डॉलर प्रति बैरल से भी पार जा सकता है।
सोना बेचना क्यों जरूरी था
सोना एक स्थिर सम्पत्ति है — लेकिन संकट के समय तुरंत काम नहीं आता। जब रुपये को बाजार में थामना हो, आयातकों को डॉलर देने हों — तो तरल विदेशी मुद्रा चाहिए होती है, सोना नहीं। इसलिए RBI ने सोना बेचकर नकद डॉलर जुटाए और उससे रुपये को सहारा दिया।
कितना सोना बेचा, कितना बचा?
अनुमान के अनुसार RBI ने लगभग 83 मीट्रिक टन सोना बेचा। इसके बाद भी RBI के पास करीब 797 मीट्रिक टन का भंडार बचा है। मार्च 2026 के अंत तक RBI के पास 880.52 मीट्रिक टन सोना था। इसमें से 77% सोना भारत में ही रखा गया था — जबकि छह महीने पहले यह आंकड़ा सिर्फ 66% था। बाकी सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और अंतर्राष्ट्रीय निपटान बैंक (BIS) में रखा हुआ है। 2025-26 में RBI ने 168.06 मीट्रिक टन सोना वापस भारत लाया था।
1991 से तुलना — तब गिरवी, अब बिक्री?
यह खबर इसलिए और बड़ी है क्योंकि भारत ने पहले कभी अपना आधिकारिक सोना नहीं बेचा था। 1991 के आर्थिक संकट में तत्कालीन चंद्रशेखर सरकार ने 46.8 मीट्रिक टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और BIS के पास गिरवी रखा था — बेचा नहीं था। नरसिम्हा राव सरकार ने बाद में वह सोना वापस ले लिया था। अभी Bank of England और BIS में जो सोना है वह उसके बाद के वर्षों में RBI द्वारा रखा गया नया भंडार है — 1991 वाला नहीं। अगर ब्लूमबर्ग का अनुमान सही है तो यह भारत के आर्थिक इतिहास में पहली बार होगा जब सोना सिर्फ गिरवी नहीं बल्कि बेचा गया।
भारतीय शेयर बाजार पर असर
इसी दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार वैश्विक रैंकिंग में खिसककर 7वें स्थान पर आ गया है। दक्षिण कोरिया के बाजार में 86% की उछाल और ताइवान के आगे निकलने ने यह स्थिति पैदा की है।
आगे क्या होगा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा कई अतिरिक्त कदमों पर विचार कर रहे हैं — जिनमें ब्याज दरें बढ़ाना और विदेशी डॉलर निवेश को आकर्षित करना शामिल है। भारत के पास अभी भी 681 अरब डॉलर का भंडार है जो 11 महीने के आयात के बराबर है — स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन यह पूरी घटना एक स्पष्ट संकेत है कि भू-राजनीतिक तनाव भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था को कितनी जल्दी प्रभावित कर सकते हैं।
RBI का खंडन — सोना नहीं बेचा
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट आने के अगले ही दिन 3 जून 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक ने आधिकारिक बयान जारी किया। RBI ने स्पष्ट किया कि सोने का भौतिक भंडार 880.52 टन पर अपरिवर्तित है। RBI के मुख्य महाप्रबंधक ब्रिज राज ने अपने बयान में कहा — “RBI इस बात पर जोर देता है कि ये रिपोर्टें सही नहीं हैं।” RBI ने यह भी बताया कि सोने का भौतिक भंडार नियमित रूप से RBI के Monthly Bulletin में सार्वजनिक किया जाता है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने भी इस खबर का फैक्ट-चेक जारी करते हुए इसे “फर्जी” बताया।
RBI के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा सितंबर 2025 के 13.92% से बढ़कर मार्च 2026 में 16.70% और 22 मई 2026 तक 16.85% हो गया है — यानी सोना घटा नहीं बल्कि बढ़ा है। हालाँकि एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि RBI का Monthly Bulletin April 24, 2026 तक का data प्रकाशित करता है — जबकि Bloomberg का विश्लेषण 22 मई 2026 तक की अवधि पर आधारित था। इस अवधि का आधिकारिक data अभी RBI ने सार्वजनिक नहीं किया है।



