देहरादून। जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन जारी रहने के बीच गुरुवार को उत्तराखंड से एक और पेपर लीक की खबर सामने आई। वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग के दो पेपर कथित तौर पर लीक हो गए। शिवालिक कॉलेज के प्रोफेसर आशीष कुमार पर आरोप है कि उन्हें परीक्षा का प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी और उन्होंने उसी से मिलते-जुलते सवाल एक व्हाट्सएप ग्रुप में छात्रों को भेजे। इसके बाद विश्वविद्यालय ने दोनों पेपर रद्द कर दिए और आरोपी पर FIR दर्ज की गई।
प्रश्नपत्र बनाया और लीक किया
आरोपी प्रोफेसर आशीष कुमार शिवालिक कॉलेज में पेपर सेटर के रूप में काम कर रहे थे। परीक्षा से पहले उन्होंने प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते सवाल एक कॉलेज के व्हाट्सएप ग्रुप में छात्रों को भेज दिए। यह सवाल परीक्षा में आने वाले प्रश्नों से इतने मिलते-जुलते थे कि मामला तुरंत संज्ञान में आ गया।
विश्वविद्यालय प्रशासन को जैसे ही इसकी जानकारी मिली उन्होंने तत्काल दोनों प्रभावित विषयों की परीक्षा रद्द कर दी। आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई।
22 बच्चों के लिए किया कॉम्प्रोमाइज
वाइस चांसलर तृप्ता ठाकुर ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आरोपी शिक्षक ने 22 बच्चों के लिए कॉम्प्रोमाइज किया जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।
VC तृप्ता ठाकुर ने बताया कि आरोपी शिक्षक को अगले 7 साल तक किसी भी परीक्षा से जुड़ी गतिविधि में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस मामले में किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। जो शिक्षक छात्रों के भविष्य की जिम्मेदारी लेकर प्रश्नपत्र तैयार करता है वह यदि उसी प्रक्रिया में धोखाधड़ी करे तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।
अगस्त में होगी दोबारा परीक्षा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि दोनों प्रभावित विषयों की परीक्षा अगस्त में नई तारीख पर आयोजित की जाएगी। जिन छात्रों की परीक्षा रद्द हुई है उन्हें नई तारीख की जानकारी जल्द दी जाएगी।
पुलिस ने आरोपी प्रोफेसर आशीष कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। व्हाट्सएप ग्रुप में भेजे गए सवालों और परीक्षा प्रश्नपत्र की तुलना की जा रही है। यह भी जांचा जा रहा है कि ग्रुप में कितने छात्र थे और जानकारी कहां तक फैली।
गौरतलब है कि देशभर में नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों का आंदोलन चल रहा है और इसी बीच उत्तराखंड में यह घटना शिक्षा व्यवस्था पर एक और सवाल खड़ा करती है।

