लखनऊ। उत्तर प्रदेश को 4 साल बाद पहला स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने का रास्ता साफ होने वाला है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) कल 26 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक कर UP के नए DGP के लिए तीन नामों का पैनल तैयार करेगा। इस पैनल से UP सरकार एक अधिकारी को स्थायी DGP के रूप में नियुक्त करेगी। रेणुका मिश्रा और आलोक शर्मा के नाम बाहर होने के बाद DGP की दौड़ में पियूष आनंद, राजीव कृष्ण और पीसी मीणा के नाम सबसे आगे हैं।
4 साल से बिना स्थायी DGP के UP
उत्तर प्रदेश में मुकुल गोयल के बाद से कोई भी स्थायी DGP नहीं बना है। 11 मई 2022 को तत्कालीन DGP मुकुल गोयल को पद से हटाए जाने के बाद से 5 अधिकारी एक के बाद एक कार्यवाहक DGP बन चुके हैं — देवेंद्र सिंह चौहान, राजकुमार विश्वकर्मा, विजय कुमार, प्रशांत कुमार और वर्तमान में राजीव कृष्ण। 5 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने स्थायी DGP नियुक्ति के लिए कड़ा आदेश जारी किया — तभी से इस पद की वैकेंसी डेट मानी गई है।
इसके बाद मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से 18 मार्च 2026 को UPSC को प्रपोजल भेजा गया — लेकिन यह पुराने प्रारूप में था। UPSC ने इसे वापस करते हुए 2025 की नई गाइडलाइन के अनुसार नए सिरे से प्रपोजल भेजने को कहा। नई गाइडलाइन में देरी का कारण बताना अनिवार्य था जो पुराने प्रारूप में नहीं था। इसके बाद अप्रैल 2026 में संशोधित प्रपोजल भेजा गया जिस पर UPSC कल बैठक करेगी।
दौड़ में तीन नाम — पियूष आनंद सीनियरिटी में आगे
पियूष आनंद — 1991 बैच के IPS अधिकारी और वर्तमान में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के महानिदेशक। सीनियरिटी लिस्ट में पहले नंबर पर हैं। उनकी सेवा जून 2028 तक है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर होने के बावजूद उनका नाम पैनल में शामिल है। CBI और CRPF में भी वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं।
राजीव कृष्ण — 1991 बैच के IPS अधिकारी जो 31 मई 2025 से UP के कार्यवाहक DGP हैं। सेवा जून 2029 तक। सीनियरिटी में दूसरे नंबर पर हैं। CM योगी के सबसे विश्वसनीय अधिकारियों में गिने जाते हैं। बतौर ADG उन्होंने ‘ऑपरेशन पहचान’ ऐप तैयार कराया जिससे अपराधियों पर शिकंजा कसा गया। ई-मालखाना, मुकदमों का डिजिटल रिकॉर्ड और साइबर अपराध अभियान उनकी सोच की देन हैं। आगरा SSP के रूप में बीहड़ के अपहरण गिरोहों के खिलाफ जमीनी कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं। उनकी छवि कड़क, फील्ड में सक्रिय और टेक्नोक्रेट अधिकारी की है। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि UPSC के टॉप थ्री पैनल में उनका नाम जरूर होगा।
प्रेम चंद मीणा (पीसी मीणा) — 1991 बैच के IPS अधिकारी, UP कैडर। वर्तमान में पुलिस आवास निगम के CMD और जेल प्रशासन एवं सुधार सेवाएं UP के DGP के पद पर कार्यरत हैं। सीनियरिटी में तीसरे नंबर पर हैं।
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रेणुका मिश्रा और आलोक शर्मा — दौड़ से बाहर
रेणुका मिश्रा UP IPS कैडर की सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं — लेकिन पेपर लीक विवाद उनके लिए भारी साबित हुआ। 14 फरवरी 2023 से 5 मार्च 2024 तक वे UP पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की चेयरमैन थीं। इस दौरान 24 फरवरी 2024 को कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हो गया। जांच में पाया गया कि बोर्ड ने ब्लैकलिस्टेड फर्म को प्रश्नपत्र छापने की जिम्मेदारी दी थी। UP सरकार ने UPSC को भेजे पत्र में स्पष्ट लिखा — “पेपर लीक के कारण परीक्षा सही से नहीं कराई जा सकी — इसलिए वे DGP पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं।” बोर्ड से हटाए जाने के बाद से वे वेटिंग में हैं।
आलोक शर्मा — 1991 बैच, वर्तमान में SPG (विशेष सुरक्षा दल) के निदेशक। 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होंगे। UPSC नियमों के अनुसार DGP के लिए न्यूनतम 6 महीने की शेष सेवा अनिवार्य है — इसलिए उनका नाम सूची से बाहर।
11 अधिकारियों को पछाड़कर बने थे कार्यवाहक DGP
31 मई 2025 को राजीव कृष्ण को 11 वरिष्ठ अधिकारियों को सुपरसीड करके कार्यवाहक DGP बनाया गया था। उस समय वे सीनियरिटी लिस्ट में 12वें नंबर पर थे — UPSC नियमों के अनुसार शीर्ष 3 बेदाग अधिकारियों में से किसी को DGP बनाया जा सकता है। इसलिए तब वे स्थायी DGP नहीं बन सके। लेकिन अब उनसे वरिष्ठ अधिकारियों में से अधिकांश रिटायर हो चुके हैं — रेणुका मिश्रा बाहर हो गई हैं और आलोक शर्मा की सेवा कम बची है। ऐसे में अब राजीव कृष्ण शीर्ष 3 में आ गए हैं।
क्यों जरूरी है स्थायी DGP?
भारत के सबसे बड़े राज्य में स्थायी पुलिस प्रमुख का न होना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं। कार्यवाहक DGP के पास दीर्घकालिक निर्णय लेने का अधिकार सीमित होता है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कानून-व्यवस्था मजबूत करने और UP पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए स्थायी DGP का होना बेहद जरूरी है।
