महराजगंज। उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में पेट्रोल-डीजल की किल्लत ने पिछले कई दिनों से आम जनजीवन और किसानों की कमर तोड़ रखी है। पेट्रोल पंपों पर घंटों लंबी कतारें, रात को मच्छरदानी और बिस्तर लेकर पंप पर सोने की मजबूरी और किसानों का चक्का जाम — यह तस्वीर बयाँ करती है कि जमीनी हालात कितने गंभीर हैं। हालांकि प्रशासन और पुलिस का कहना है कि डीजल-पेट्रोल की कोई कमी नहीं है।
रात को पंप पर बिस्तर लगाकर सो रहे लोग
शिकारपुर स्थित इंडेन पेट्रोल पंप पर किसान डीजल के लिए रात से ही लाइन में लग जा रहे हैं। सुबह तक नंबर आने का इंतजार करते हुए लोग वहीं बिस्तर लगाकर सो रहे हैं। कहीं-कहीं डीजल सुबह 10 बजे पहुँचता है तो कहीं दोपहर बाद। हालात इतने बिगड़े कि जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल को खुद आगे आकर पहले सुबह 7 से शाम 7 बजे तक पेट्रोल पंप संचालित करने के निर्देश देने पड़े। बाद में हालात और बिगड़ते देख यह समय बढ़ाकर 24 घंटे कर दिया गया।
मिठौरा में ट्रैक्टरों की लंबी कतारें
मिठौरा क्षेत्र में भी डीजल संकट ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। चौक, रुदरौली, मिठौरा, सिंदुरिया सहित दर्जनों पेट्रोल पंपों पर ट्रैक्टरों की लंबी कतारें दूर तक दिखाई दे रही हैं। चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के बीच किसान भूखे-प्यासे घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। कई किसान सिर पर गमछा रखकर धूप से बचने की कोशिश करते दिखे।
एक किसान ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा — “जैसे ही पता चलता है कि कल डीजल आएगा, उसी रात से लाइन में लग जाओ — वरना सुबह नंबर नहीं आता। कभी-कभी पूरा दिन खड़े रहो तब भी खाली हाथ लौटना पड़ता है।” किसानों का कहना है कि इस संकट की सबसे बड़ी मार खेती पर पड़ रही है — जुताई, सिंचाई और बुवाई सब पिछड़ रही है। अगर समय पर सिंचाई न हो तो फसल बर्बाद होने का खतरा सामने खड़ा है।
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नौतनवा में भी महीनों से जारी है संकट
नौतनवा में यह तकलीफ कोई एक-दो दिन की नहीं — बल्कि महीनों से लोग इसी हाल में जी रहे हैं। हर सुबह कस्बे के मुख्य मार्ग स्थित पेट्रोल पंप के सामने लंबी कतारें लग जाती हैं। बाइक, ट्रैक्टर और अन्य वाहनों की इस भीड़ से सड़क जाम हो जाती है और आस-पास आवाजाही करने वाले लोग भी फँस जाते हैं। तेल मिलने की उम्मीद में लोग घंटों खड़े रहते हैं — और दोपहर होते-होते जब तेल खत्म हो जाता है तो पंप पर सन्नाटा पसर जाता है। जो लोग घंटों इंतजार करके भी खाली हाथ लौटते हैं — उनकी निराशा किसी से छुपी नहीं। अगले दिन फिर वही कहानी दोहराई जाती है।
घुघली में किसानों का चक्का जाम
घुघली-सिसवा मार्ग स्थित माँ भगवती किसान सेवा केंद्र (इंडियन ऑयल) पर गैलन में डीजल न मिलने से नाराज किसानों ने चक्का जाम कर दिया। किसानों का कहना था कि उनके पास ट्रैक्टर नहीं है और सिंचाई के लिए पंप सेट चलाने के लिए गैलन में डीजल ले जाना पड़ता है। घुघली नगर चौकी इंचार्ज शिवम राय पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुँचे और किसानों को समझाकर जाम हटवाया।
SDM ने की जाँच — खतौनी दिखाने पर डीजल
नौतनवा के SDM ने खुद पेट्रोल पंपों पर पहुँचकर ईंधन वितरण व्यवस्था की जाँच की। उन्होंने किसानों को खतौनी और आधार कार्ड दिखाने पर गैलन में डीजल देने के निर्देश दिए। पंप स्वामियों को साफ चेतावनी दी कि मनमानी या कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं होगी।
पुलिस बोली — कमी नहीं, तस्करी रोकना जरूरी
महराजगंज पुलिस ने इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वाहनों में डीजल-पेट्रोल भरने की कोई सीमा नहीं है। ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में किसानों की आपूर्ति के लिए भी कोई प्रतिबंध नहीं है। सिर्फ गैलन में तेल लेने वालों के लिए 5 लीटर की सीमा रखी गई है — यह अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर की संवेदनशीलता और तस्करी-कालाबाजारी रोकने के लिए किया गया है। सभी पंपों पर पुलिस बल तैनात किया गया है।
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प्रशासन का दावा — पर्याप्त स्टॉक है
जिला पूर्ति अधिकारी एपी सिंह ने बताया कि जनपद में 929 किलो लीटर डीजल और 632 किलो लीटर पेट्रोल उपलब्ध है। सामान्य दिनों में रोज 250 किलो लीटर डीजल की माँग रहती है — लेकिन अभी लोग जरूरत से ज़्यादा खरीदारी कर रहे हैं जिससे दैनिक माँग बढ़कर 371 किलो लीटर हो गई है। यानी संकट की असली वजह पैनिक बाइंग है — डीजल की कमी नहीं।
ज़मीन और कागज़ में फर्क
प्रशासन कागज़ पर चाहे जो भी कहे — ज़मीनी तस्वीर अलग है। पंप पर रात गुजारते लोग, भूखे-प्यासे धूप में खड़े किसान और चक्का जाम — यह सब बताता है कि आम आदमी की परेशानी कम नहीं हुई है। हालांकि एक सकारात्मक कदम यह है कि प्रशासन ने 24 घंटे पंप संचालन का आदेश दे दिया है। किसानों की माँग है कि नियमित और सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित की जाए — ताकि फसल बर्बाद होने से बचे।
