लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लखनऊ में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की चौथी बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक उत्तर प्रदेश के विकास की दिशा तय करने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक रही — जिसमें बुनियादी ढांचे, परिवहन, कृषि निर्यात, औद्योगिक विकास और रक्षा उत्पादन से जुड़ी दर्जनों परियोजनाओं की गहन समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने हर विभाग के अधिकारियों को कड़े और स्पष्ट निर्देश दिए — और यह साफ कर दिया कि अब सिर्फ घोषणाएं नहीं — ज़मीन पर नतीजे चाहिए।
जेवर एयरपोर्ट के लिए 110 इलेक्ट्रिक बसें
बैठक में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और YEIDA क्षेत्र में 500 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक आवागमन के लिए पहले चरण में 110 इलेक्ट्रिक बसों की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 15 जून से प्रस्तावित उड़ान संचालन शुरू होने से पहले सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त कर लिया जाए। इसके साथ ही प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के तेज़ी से विस्तार पर भी जोर दिया गया। बिना पर्याप्त चार्जिंग स्टेशनों के इलेक्ट्रिक बसों का संचालन संभव नहीं — इसलिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा-जेवर पूरे रूट पर चार्जिंग पॉइंट्स तैयार करने के निर्देश दिए गए।
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तीन एक्सप्रेसवे का भूमि अधिग्रहण जून तक
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे और झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए जरूरी भूमि अधिग्रहण जून माह के अंत तक हर हाल में पूरा कर लिया जाए। किसी भी तरह की देरी स्वीकार्य नहीं होगी।
इन तीनों एक्सप्रेसवे परियोजनाओं का महत्व अलग-अलग है। आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को जोड़ने वाली एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। जेवर लिंक एक्सप्रेसवे नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक सीधी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा — जिससे यात्रियों और कारोबारियों दोनों को फायदा होगा। वहीं झांसी लिंक एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास को नई गति देगा।
जेवर के पास Agriculture Export Hub
मुख्यमंत्री ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निकट प्रस्तावित एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट हब की समीक्षा करते हुए कहा कि कृषि और मत्स्य आधारित उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने के लिए आधुनिक प्रोसेसिंग और निर्यात सुविधाएं विकसित की जाएं। जेवर एयरपोर्ट के पास यह हब रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है — यहाँ से सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें होंगी जिससे खेत से निकली ताज़ी उपज घंटों में दुनिया के बाज़ारों तक पहुँच सकेगी। इससे उत्तर प्रदेश के किसानों और मछुआरों को अपनी उपज का सीधा अंतरराष्ट्रीय बाज़ार मिलेगा — बिचौलियों की भूमिका कम होगी और आमदनी बढ़ेगी।
इसके अलावा बैठक में उन्नाव में एक्वा ब्रिज परियोजना की भी समीक्षा की गई। यह परियोजना मत्स्य पालन और जलीय कृषि को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्नाव क्षेत्र में मछली पालन से जुड़े हजारों परिवारों को इस परियोजना से सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
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लखनऊ में Seed Park और Textile Park
लखनऊ में प्रस्तावित सीड पार्क और टेक्सटाइल पार्क परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन्हें प्रदेश के कृषि और औद्योगिक विकास से जोड़कर तेज़ी से आगे बढ़ाया जाए।
सीड पार्क किसानों के लिए एक बड़ा कदम साबित होगा — यहाँ उन्नत किस्म के बीजों का उत्पादन, भंडारण और वितरण एक ही जगह से होगा। इससे प्रदेश के किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज आसानी से और सही समय पर मिल सकेंगे। वहीं टेक्सटाइल पार्क लखनऊ के पारंपरिक चिकनकारी और कपड़ा उद्योग को एक नई औद्योगिक पहचान देगा। इससे न केवल स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को फायदा होगा — बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह दोनों परियोजनाएं लखनऊ को एक नए औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएंगी और इन्हें निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाए।
Defence Industrial Corridor में UP बनेगा अग्रणी
बैठक में उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की परियोजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य तय किया गया है और इस दिशा में तेज़ी से काम किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रक्षा क्षेत्र के निवेशकों को हर जरूरी सहयोग और सुविधा उपलब्ध कराई जाए — चाहे वह भूमि आवंटन हो, लाइसेंस प्रक्रिया हो या किसी अन्य प्रकार की मंजूरी। UP डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर लखनऊ, कानपुर, आगरा, झांसी, अलीगढ़ और चित्रकूट जैसे शहरों को जोड़ता है — और यह प्रदेश में हजारों रोजगार पैदा करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि रक्षा उत्पादन में उत्तर प्रदेश की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाना इस सरकार की प्राथमिकता है।
CM Review Cell गठित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने ‘सीएम समीक्षा’ में शामिल सभी परियोजनाओं को शीर्ष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष सेल गठित किया जाए जो इन परियोजनाओं की नियमित और सख्त मॉनिटरिंग सुनिश्चित करे। यह सेल सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन काम करेगा — ताकि हर परियोजना की प्रगति की जानकारी सीधे शीर्ष स्तर तक पहुँचती रहे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोई भी परियोजना तय लक्ष्य से पीछे नहीं रहनी चाहिए। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि अगर किसी परियोजना में कोई अड़चन आए तो उसे तुरंत उच्च स्तर पर रिपोर्ट किया जाए और समाधान निकाला जाए। यह पहल उत्तर प्रदेश सरकार की उस सोच को दर्शाती है जिसमें घोषणाओं को ज़मीन पर उतारना सर्वोच्च प्राथमिकता है। बड़े-बड़े वादों और योजनाओं के बावजूद अगर क्रियान्वयन कमज़ोर रहे तो विकास की रफ्तार धीमी पड़ जाती है — इसीलिए मुख्यमंत्री ने इस विशेष मॉनिटरिंग तंत्र को अनिवार्य बनाया है।
