नई दिल्ली। NEET और CBSE के बाद अब UPSC सिविल सेवा प्रीलिम्स 2026 विवादों की चपेट में आ गई है। 24 मई 2026 को देशभर में हुई इस परीक्षा में शामिल 5.5 लाख से ज़्यादा अभ्यर्थी सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा उतार रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि इस बार का पेपर न केवल असामान्य रूप से कठिन था बल्कि अनुचित, भ्रामक और पाठ्यक्रम से परे भी था।
क्या था पेपर में
इस बार जनरल स्टडीज पेपर 1 इतना लंबा था कि कई छात्रों को समय की भारी कमी पड़ी। छात्रों का कहना है कि प्रश्नों की प्रकृति पिछले वर्षों से बिल्कुल अलग थी। जहाँ पहले सीधे तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाते थे — वहीं इस बार विश्लेषणात्मक और अंतर-विषयक प्रश्नों की भरमार थी। पर्यावरण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के सेक्शन को सबसे कठिन बताया गया।
कई छात्रों ने यह भी कहा कि 20 तक के प्रश्न छोड़ने पड़े — सिर्फ इसलिए कि समय नहीं बचा। अनुभवी कोचिंग शिक्षक और पूर्व अधिकारी भी मान रहे हैं कि इस बार का कट-ऑफ ऐतिहासिक रूप से कम रह सकता है।
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CSAT ने भी किया परेशान
CSAT (सिविल सर्विसेज़ एप्टीट्यूड टेस्ट) को लेकर भी छात्रों में जबरदस्त नाराज़गी है। इस बार CSAT में संचार सिद्धांत (Communication Theory) पर आधारित प्रश्न पूछे गए — जो परंपरागत CSAT तैयारी का हिस्सा नहीं माने जाते। कई छात्रों को डर है कि UPSC ने CSAT को फिर से एक छुपे हुए elimination tool की तरह इस्तेमाल किया है।
हिंदी माध्यम के छात्रों को दोहरी मार
इस पूरे विवाद में सबसे दर्दनाक पहलू हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों का है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ समेत हिंदी माध्यम से लाखों छात्र हर साल UPSC की तैयारी करते हैं और हिंदी माध्यम में परीक्षा देते हैं। लेकिन इस बार हिंदी अनुवाद इतना यांत्रिक और भ्रामक था कि छात्रों को एक ही प्रश्न कई बार पढ़ना पड़ा। इससे उनका कीमती समय बर्बाद हुआ। छात्रों का कहना है कि यह ज्ञान की परीक्षा नहीं बल्कि भाषा को डिकोड करने की जंग बन गई।
कोचिंग शिक्षकों ने खुलकर बोला
दिल्ली के मुखर्जी नगर — जो देश का सबसे बड़ा UPSC कोचिंग हब है — वहाँ से जमकर विरोध सामने आया। जाने-माने UPSC कोच अमित किल्होर ने वीडियो बनाकर UPSC अध्यक्ष अजय कुमार को सीधे चुनौती दी और प्रश्नपत्र बनाने वाले अज्ञात प्रोफेसरों पर सवाल उठाए। एक वरिष्ठ IFS अधिकारी राहुल कुमार गुप्ता ने भी कहा कि ऐसे प्रश्न परीक्षा हॉल में घबराहट पैदा करने के लिए बनाए जाते हैं — ज्ञान परखने के लिए नहीं।
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UPSC की चुप्पी
इतने बड़े विवाद के बावजूद UPSC ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के पारदर्शिता संबंधी दिशा-निर्देशों के चलते UPSC जल्द ही प्रोविजनल आंसर की जारी करेगा — जहाँ छात्र Question Paper Representation Portal के ज़रिए आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। लेकिन छात्रों का कहना है कि आंसर की से उनकी मानसिक थकान और निराशा दूर नहीं होगी।
बार-बार क्यों उठता है यह सवाल
यह पहली बार नहीं है जब UPSC पर सवाल उठे हों। 2024 में भी CSAT की कठिनाई और हिंदी अनुवाद की खराब गुणवत्ता को लेकर बड़ा आंदोलन हुआ था। NSUI ने कहा था कि CSAT केवल इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट पृष्ठभूमि के छात्रों के पक्ष में झुकी हुई है। मानविकी और हिंदी माध्यम के छात्र लगातार उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। सवाल यह है कि जो परीक्षा देश के सबसे काबिल अधिकारी चुनने के लिए होती है — वह खुद ही हर साल विवादों में क्यों घिरती है?
