कानपुर/लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए), कानपुर में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026 को संबोधित किया। उन्होंने भारत की ऐतिहासिक आर्थिक समृद्धि, किसानों की दुर्दशा और प्राकृतिक खेती के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे। प्रदेशभर से सैकड़ों किसान इस कार्यशाला में शामिल हुए।
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विदेशी नकल ने भारत को बनाया विपन्न
सीएम ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि आज से 2000 वर्ष पहले वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत थी। मुगलों की लूटपाट के बावजूद यह 24 प्रतिशत बनी रही। जब तक भारत ने अपने किसानों, व्यापारियों, युवाओं और महिलाओं की शक्ति पर भरोसा रखा, देश समृद्धि की राह पर चलता रहा।
लेकिन जब विदेशी तरीके अपनाए गए तो स्वतंत्रता के समय तक भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी घटकर मात्र दो प्रतिशत रह गई। सीएम ने कहा कि PM मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में एक बार फिर नारी शक्ति, युवाओं, व्यापारियों और किसानों पर भरोसा जताया गया — और आज भारत दुनिया की चौथी-पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। अब भारत बीमारू नहीं, विकसित भारत बनने की दिशा में अग्रसर है।
मोदी सरकार में बदली किसानों की तकदीर
सीएम ने किसानों की पीड़ा का जिक्र करते हुए कहा कि इतनी समृद्ध भूमि होने के बावजूद 2014 से पहले अन्नदाता किसान आत्महत्या करने पर मजबूर था। लागत अधिक, उत्पादन कम और उपज का उचित मूल्य भी नहीं मिलता था।
PM मोदी ने किसानों को उनकी फसल की लागत का न्यूनतम डेढ़ गुना मूल्य दिलाने की गारंटी दी — यह पहले किसी सरकार ने नहीं किया। 2004 से 2014 के बीच देश में बड़े पैमाने पर किसान मौत को गले लगा रहे थे, लेकिन 2014 के बाद इस स्थिति में बदलाव आया। सॉइल हेल्थ कार्ड के जरिए पहली बार धरती माता के स्वास्थ्य का परीक्षण शुरू हुआ। PM फसल बीमा योजना, PM कृषि सिंचाई योजना, प्रोक्योरमेंट सेंटर और किसान सम्मान निधि — इन सभी से किसानों की स्थिति बदली।
प्राकृतिक खेती ही समाधान
सीएम ने चेताया कि फर्टिलाइजर और पेस्टीसाइड के अत्यधिक उपयोग के कारण भारत का उत्पादन कई बार विश्व बाजार में स्वीकार नहीं किया जाता क्योंकि उसमें रासायनिक तत्वों की मात्रा अधिक होती है। इसका स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। 30 वर्ष पहले किडनी खराब होने के इतने मामले नहीं थे — आज हर मोहल्ले में दो-तीन किडनी रोगी मिलते हैं। लिवर सिरोसिस, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मामलों में भी तेजी से वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि किसानों को पराली जलाने के बजाय सीबीजी और एथेनॉल उत्पादन में योगदान देना चाहिए। इससे भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
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7,700 गौशालाएं और गौ-आधारित खेती
सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 34 जनपद गौ-आधारित खेती की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। गंगा किनारे के 27 जनपदों और बुंदेलखंड के 7 जनपदों को प्राकृतिक खेती के लिए चिन्हित किया गया है। प्रदेश की 7,700 से अधिक गौशालाओं में 14 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं और उनकी देखभाल राज्य सरकार कर रही है।
गौ संरक्षण पर उन्होंने कड़े शब्दों में कहा — “कुछ लोग गाय का दूध पिएंगे, फिर उन्हें सड़कों पर बेसहारा छोड़ देंगे और जब ये गाय फसलों का नुकसान करेंगी तो दोष मुझे देंगे। हमारा संकल्प है कि गौमाता को कटने नहीं देंगे।” उन्होंने कहा कि सीएसए के कृषि विज्ञान केंद्र प्राकृतिक खेती के डेमोंस्ट्रेशन का आधार बनाए गए हैं।
विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए सीएम ने कहा — “जब वैश्विक ऊर्जा संकट आया, दुनिया चुनौतियों से जूझ रही थी — भारत मजबूती से खड़ा था। विपक्ष का काम सिर्फ चिल्लाना है और चिल्लाता ही रहेगा।”

