नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को आधुनिक बनाने और राशन दुकानों को मजबूत करने के लिए ₹25,530 करोड़ की ‘सार्थक पीडीएस योजना’ को मंजूरी दे दी है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को मंत्रिमंडल बैठक के बाद यह जानकारी दी। इस फैसले का सीधा असर देश के उन 80 करोड़ नागरिकों पर पड़ेगा जो अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए सरकार के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम पर निर्भर हैं।
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“दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम” — वैष्णव
मंत्रिमंडल बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आज का यह निर्णय देश के 80 करोड़ नागरिकों को सीधे प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम चला रहा है। इस कार्यक्रम के तहत हर महीने 80 करोड़ नागरिकों को बुनियादी राशन उपलब्ध कराया जाता है। वैष्णव ने कहा कि यह कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर समावेशी विकास के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल तकनीक के उपयोग से राशन वितरण व्यवस्था में बड़ा सुधार आया है। हालांकि अभी भी कई राज्यों में खाद्यान्न परिवहन और उचित मूल्य दुकानों की स्थिति को और बेहतर बनाने की जरूरत थी — जिसे यह योजना पूरा करेगी।
योजना में क्या-क्या मिलेगा
सार्थक पीडीएस योजना के तहत कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। पहला — राज्य के भीतर खाद्यान्न परिवहन के लिए राज्य एजेंसियों को सहायता दी जाएगी। दूसरा — उचित मूल्य की दुकानों यानी राशन दुकानों को सशक्त करने के लिए समर्थन का प्रावधान होगा। तीसरा — सार्वजनिक वितरण प्रणाली का आधुनिकीकरण किया जाएगा जिससे राशन वितरण में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। इस पूरी योजना का कुल परिव्यय ₹25,530 करोड़ है।
सार्थक पीडीएस योजना के तहत e-POS मशीनों को अपग्रेड किया जाएगा जिससे बायोमेट्रिक सत्यापन और बेहतर होगा। इससे फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी और असली जरूरतमंदों को राशन मिलना सुनिश्चित होगा। साथ ही गोदाम प्रबंधन को भी डिजिटल किया जाएगा ताकि खाद्यान्न की बर्बादी कम हो और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत बने।
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80 करोड़ लोगों पर सीधा असर
भारत में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत देश की लगभग 67 प्रतिशत आबादी को सस्ती दरों पर अनाज मिलता है। इनमें गरीब, मजदूर, किसान और वंचित वर्ग शामिल हैं। सार्थक पीडीएस योजना से इन्हीं लोगों तक राशन की पहुंच और बेहतर होगी। साथ ही डिजिटल तकनीक के जरिए राशन वितरण में होने वाली गड़बड़ियों पर भी रोक लगेगी। नतीजतन लाभार्थियों को सही समय पर सही मात्रा में राशन मिल सकेगा।
केंद्र सरकार का यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘सबका साथ, सबका विकास’ नीति का हिस्सा है। वर्तमान में देश में 5 लाख से अधिक उचित मूल्य की दुकानें हैं जो हर महीने लाखों परिवारों को अनाज वितरित करती हैं। इस योजना से इन दुकानों की स्थिति और बेहतर होगी। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में जहां लाभार्थियों की संख्या सबसे अधिक है — वहां इस योजना का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा।
