नई दिल्ली। साल 2026 में CBSE लगातार विवादों के घेरे में रहा। एक तरफ कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन में गड़बड़ी के आरोप लगे। दूसरी तरफ तीन भाषा नीति ने देशभर में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। राहुल गाँधी से लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तक — सभी ने CBSE पर निशाना साधा। नतीजतन मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा। इतना ही नहीं, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को खुद जिम्मेदारी स्वीकार करनी पड़ी।
OSM Portal विवाद — answer sheet किसी और की, नाम किसी और का
यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक छात्र ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया। उसने बताया कि उसकी कक्षा 12 भौतिकी (Physics) की उत्तर पुस्तिका उसकी थी ही नहीं। हस्तलेखन बिल्कुल अलग था। दरअसल यह CBSE का नया ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन (OSM) तंत्र था। इसके तहत उत्तर पुस्तिकाओं को भौतिक रूप से जाँचने की जगह डिजिटल तरीके से स्क्रीन पर अंक दिए गए। इस तंत्र के लिए CBSE ने COEMPT Edutech कंपनी को ठेका दिया था।
जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, देशभर में हंगामा मच गया। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने इसे “बड़े पैमाने पर छेड़छाड़” बताया। उन्होंने विशेष जाँच दल से जाँच की माँग की। साथ ही उन्होंने एक्स पर वीडियो जारी करते हुए आरोप लगाया कि COEMPT कंपनी पहले Globarena नाम से जानी जाती थी। उनके अनुसार इसी कंपनी ने तेलंगाना में 2019 और 2023 में भी ऐसे घोटाले किए थे। उन गड़बड़ियों से जुड़ी परिस्थितियों में 23 छात्रों की आत्महत्या हुई थी। इसके बावजूद CBSE ने उसी कंपनी को दोबारा ठेका दिया — यही उनका सवाल था।
हालाँकि CBSE ने सभी आरोपों को “गलत, भ्रामक और तथ्यहीन” बताया। बोर्ड के अनुसार ठेका देने में सामान्य वित्तीय नियमों का पूरी तरह पालन हुआ। इसके अलावा CBSE ने स्पष्ट किया कि जिस पोर्टल का जिक्र था, वह केवल नमूना डेटा वाली परीक्षण साइट थी। फिर भी विवाद शांत नहीं हुआ। अंततः शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गड़बड़ियों की जिम्मेदारी स्वीकार की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई का वादा भी किया।
तीन भाषा नीति — हिंदी थोपने का आरोप
इसके अलावा CBSE का दूसरा बड़ा विवाद तीन भाषा नीति को लेकर रहा। अप्रैल 2026 में CBSE ने घोषणा की कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कक्षा 6 से तीन भाषाएँ अनिवार्य होंगी। उस वक्त कहा गया था कि कक्षा 9 के लिए यह नीति 2029-30 से लागू होगी। पर 15 मई 2026 को CBSE ने अचानक नया परिपत्र जारी किया। इसमें कहा गया कि कक्षा 9 में तीन भाषाएँ 1 जुलाई 2026 से ही अनिवार्य होंगी। यानी जो छात्र कक्षा 6 में भाषा चुन चुके थे, उन्हें अचानक एक नई भाषा जोड़नी होगी।
परिणामस्वरूप तमिलनाडु में प्रतिक्रिया सबसे तीखी रही। तत्कालीन मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इसे “भाषाई थोपने का सुनियोजित प्रयास” बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हिंदी भाषी राज्यों के छात्रों को भी तमिल या तेलुगु पढ़ना अनिवार्य होगा। डीएमके सांसद कनिमोझी ने इसे गैर-हिंदी राज्यों पर “क्रूर हमला” बताया। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर #StopHindiImposition ट्रेंड हो गया।
इस बीच 26 मई 2026 को BJP के पूर्व तमिलनाडु अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भी इस नीति का विरोध किया। यह विरोध उनके BJP से अलगाव की अंतिम कड़ी बनी। तत्पश्चात माता-पिता और शिक्षकों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की। 27 मई 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त की पीठ ने केंद्र, CBSE और एनसीईआरटी को नोटिस जारी किया। न्यायालय ने रोक लगाने से इनकार किया। हालाँकि जुलाई में विस्तृत सुनवाई तय की गई।
साल में दो बार — नया प्रयोग, नई चुनौतियाँ
इसी क्रम में CBSE ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिश के अनुरूप 2026 से Class 10 बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित करने का निर्णय लिया। पहला चरण 17 फरवरी से 11 मार्च — सभी के लिए अनिवार्य। दूसरा चरण 15 मई से 1 जून — केवल उन छात्रों के लिए वैकल्पिक जो तीन विषयों में अंक सुधारना चाहते हैं। बोर्ड दोनों में से बेहतर अंक को अंतिम मानेगा। इसके अलावा कक्षा 9 और 10 में गणित और विज्ञान के दो स्तर — अनिवार्य सामान्य और वैकल्पिक उन्नत — की भी घोषणा की गई। Class 10 बोर्ड परीक्षाओं का पहला नया प्रारूप 2028 में लागू होगा।
पर इन बदलावों के साथ कई शिकायतें भी सामने आईं। फ्रेंच, स्पेनिश और जर्मन जैसी विदेशी भाषाओं के शिक्षकों ने गंभीर चिंता जताई। उनका कहना था कि तीन भाषा नीति के लागू होने से विदेशी भाषाओं की पढ़ाई हाशिये पर चली जाएगी और हज़ारों योग्य शिक्षकों की नौकरियाँ खतरे में पड़ सकती हैं। कई विद्यालयों ने भी स्वीकार किया कि तीसरी भाषा की पाठ्यपुस्तकें अभी तैयार नहीं हैं और ऐसे में नीति को इतनी जल्दी लागू करना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा। इस पर CBSE ने सभी विद्यालयों को निर्देश दिया कि वे 30 जून तक अपनी तीसरी भाषा की जानकारी ओएसिस पोर्टल पर अपडेट करें।
CBSE पर बड़ी कार्रवाई
इन तीनों विवादों ने मिलकर CBSE की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए। ओएसएम पोर्टल में गड़बड़ी ने लाखों छात्रों के अंकों और भविष्य पर संदेह पैदा किया। तीन भाषा नीति की जल्दबाज़ी ने संघीय ढाँचे और भाषाई विविधता को लेकर बहस छेड़ दी। और कक्षा 10 को साल में दो बार कराने का नया तंत्र अभी अपनी शुरुआती समस्याओं से गुज़र रहा है।
आखिरकार 2 जून 2026 को केंद्र सरकार ने कड़ा कदम उठाया। CBSE अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया। नए अध्यक्ष के रूप में गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर तैनात वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को नियुक्त किया गया है। वहीं उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक वरुण भारद्वाज CBSE के नए सचिव होंगे — उनका कार्यकाल 19 सितंबर 2027 तक रहेगा। राहुल सिंह को अब कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में भेजा गया है।
इसके साथ ही ओएसएम खरीद प्रक्रिया की जाँच के लिए विशेष जाँच समिति बनाई गई है। इसकी अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान करेंगी। समिति निविदा प्रक्रिया, साइबर सुरक्षा और अनुबंध से जुड़े सभी पहलुओं की जाँच करेगी। ज़रूरत पड़ने पर अन्य विभागों के अधिकारियों की मदद भी ली जा सकेगी। सरकार ने समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को सौंपने के निर्देश दिए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में अब जुलाई 2026 में होने वाली सुनवाई इस पूरे विवाद का अगला अहम मोड़ होगी।

