मुंबई। रेल यात्रियों के लिए बुधवार को पहले बुरी खबर आई — फिर राहत की। मध्य रेलवे ने मंगलवार को स्टेशनों पर बिकने वाले खाने-पीने के सामान के दाम बढ़ाने का ऐलान किया था। लेकिन जनता और व्यापारियों की तीखी आलोचना के बाद महज 24 घंटे के भीतर यह फैसला वापस ले लिया गया। अब पुराने रेट ही जारी रहेंगे।
क्या था प्रस्तावित बदलाव
मध्य रेलवे के Chief Commercial Manager (Claims & Catering) के दफ्तर से 25 मई 2026 को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी हुआ था। इसमें 1 जून 2026 से स्टेशनों के छोटे कैटरिंग स्टॉल्स पर नई दरें लागू करने का आदेश था। यह सर्कुलर भुसावल, भोपाल, सोलापुर, नागपुर और पुणे सहित कई डिवीजनों के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधकों को भेजा गया था।
प्रस्तावित बदलावों के मुताबिक वड़ा पाव ₹13 से बढ़कर ₹20 और समोसा ₹12 से बढ़कर ₹20 होने वाला था। रगड़ा ब्रेड ₹20 से ₹25, ड्राई भेल ₹20 से ₹25 और चटनी भेल ₹25 से ₹30 होने वाली थी। इसके अलावा चना, चिक्की और मिल्कशेक को मेनू से पूरी तरह हटाने का भी प्रस्ताव था — इन्हें PAD (Proprietary Article Depot) यानी ब्रांडेड पैकेज्ड उत्पादों की श्रेणी में डाल दिया गया था। हालांकि कचोरी, गुलाब जामुन, ताज़े जूस और वेज नूडल्स समेत 16 आइटम्स के दाम नहीं बढ़ाए जाने थे।
विरोध और वापसी
जैसे ही यह खबर फैली — यात्री संगठनों और कैटरिंग एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताया। कैटरिंग एसोसिएशन के प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि रेलवे सस्ते देसी खाने को हतोत्साहित कर ब्रांडेड पैकेज्ड उत्पादों को बढ़ावा देना चाहता है — जो न केवल महंगे हैं बल्कि मात्रा में भी कम। उन्होंने यह भी कहा कि चना, मूंगफली, चिक्की और मिल्कशेक जैसी चीज़ें हटाने से गरीब और मध्यमवर्गीय यात्री सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे — क्योंकि यही उनके सफर का सबसे सस्ता सहारा है।
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आलोचना इतनी तेज़ हुई कि मध्य रेलवे को 27 मई को ही अपना फैसला पलटना पड़ा। रेलवे अधिकारियों ने पुष्टि की कि अगले आदेश तक पुराने रेट ही लागू रहेंगे।
पाँच साल बाद बदलाव की कोशिश
मध्य रेलवे ने आखिरी बार 2021 में अपने स्टेशनों पर खाने के दाम तय किए थे। पाँच साल की चुप्पी के बाद इस बार बदलाव लाने की कोशिश हुई — लेकिन जनता के सामने टिक नहीं पाई। गौरतलब है कि पश्चिम रेलवे यही कदम 2025 में उठा चुकी है और वहाँ दाम बढ़े भी — लेकिन मध्य रेलवे के मामले में यात्रियों और व्यापारियों का विरोध इतना तेज़ था कि प्रशासन को एक दिन के भीतर ही पीछे हटना पड़ा।
आम यात्री की थाली पर असर
भारत में रोज़ाना करोड़ों लोग ट्रेन से सफर करते हैं। इनमें बड़ी संख्या उन मजदूरों, छात्रों और छोटे व्यापारियों की है जो लंबी दूरी की यात्राएं करते हैं और स्टेशन पर मिलने वाले सस्ते खाने पर निर्भर रहते हैं। वड़ा पाव और समोसा सिर्फ नाश्ता नहीं — यह करोड़ों यात्रियों की जेब के हिसाब से बना एक ज़रूरी विकल्प है। ₹13 का वड़ा पाव अगर ₹20 हो जाता तो यह 54% की बढ़ोतरी होती — जो आम आदमी के लिए बड़ा झटका था।
करोड़ों यात्रियों को मिली राहत
महंगाई के इस दौर में रेलवे का यह U-turn आम यात्री के लिए बड़ी राहत है — भले ही यह राहत अस्थायी हो। रेलवे ने “अगले आदेश तक” कहकर यह संकेत ज़रूर दे दिया है कि भविष्य में दाम बढ़ सकते हैं। लेकिन फिलहाल जनता की आवाज़ ने सरकारी तंत्र को झुकाया — और यही इस खबर की असली जीत है।
