गुवाहाटी। असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने सोमवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए विधानसभा में “यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम विधेयक 2026” पेश किया। संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने सदन में यह विधेयक रखा। विधेयक पेश होते ही विधानसभा में सियासी हंगामा मच गया और विपक्षी दलों के विधायकों ने विधेयक का जोरदार विरोध किया। 2024 में उत्तराखंड UCC लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था — उसके बाद गुजरात ने भी यूसीसी विधेयक पेश किया था। अब इसी कड़ी में असम भी UCC विधेयक पेश करने वाला तीसरा राज्य बन गया है।
UCC Bill में क्या है खास?
असम के UCC Bill 2026 में कई अहम प्रावधान किए गए हैं। इससे पहले राज्य मंत्रिमंडल इस विधेयक को हरी झंडी दे चुका था। यह विधेयक राज्य में सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करने की दिशा में बड़ा कदम है। विधेयक के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं —
- बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध — एक से अधिक विवाह करना अब कानूनी अपराध माना जाएगा। यह प्रावधान सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होगा।
- विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण — अब हर विवाह और तलाक को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराना अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण के विवाह को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी।
- Live-in Relationship का पंजीकरण अनिवार्य — साथ रहने वाले बिना विवाह के जोड़ों को भी सरकार के पास अपना पंजीकरण कराना होगा। यह एक नया और चर्चित प्रावधान है जो उत्तराखंड के UCC में भी था।
- अनुसूचित जनजातियों को छूट — असम में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय हैं। उनकी परंपराओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस विधेयक के दायरे से बाहर रखा गया है।
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विपक्ष का जोरदार विरोध
विधेयक पेश होते ही Congress, रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस (TMC) समेत तमाम विपक्षी दलों ने सदन में जोरदार हंगामा किया। विपक्ष की माँग थी कि इतने बड़े और संवेदनशील विधेयक को सदन में पेश करने से पहले सभी समुदायों, धार्मिक संगठनों और जनजातीय समूहों के साथ व्यापक परामर्श होना चाहिए था। Congress विधायक जाकिर हुसैन सिकंदर ने कहा कि इस कानून से असम को कोई वास्तविक फायदा नहीं होगा। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार दिल्ली और नागपुर को खुश करने के लिए यह बिल लाई है और महंगाई व बेरोजगारी के असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है।
27 मई को होगी बड़ी बहस
विधेयक पेश होने के बाद 27 मई को असम विधानसभा में इस पर विस्तृत बहस तय मानी जा रही है। विपक्ष के कड़े तेवरों और सदन में हुए हंगामे को देखते हुए यह बहस बेहद तीखी रहने के आसार हैं। Congress, रायजोर दल और TMC पहले ही अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं और बहस के दौरान वे सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की तैयारी में हैं। विपक्ष की माँग है कि बिल को सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए ताकि सभी पक्षों से व्यापक राय ली जा सके। हालाँकि हिमंत सरमा सरकार अपने फैसले पर पूरी तरह अडिग दिख रही है और सत्तापक्ष के पास विधानसभा में बहुमत भी है।
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उत्तराखंड के बाद तीसरा राज्य
2024 में उत्तराखंड UCC लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था। इसके बाद गुजरात ने भी यूसीसी विधेयक सदन में पेश किया। अब असम विधानसभा में UCC Bill पेश करने वाला तीसरा राज्य बन गया है — हालाँकि यह विधेयक अभी पारित नहीं हुआ है। 27 मई को बहस के बाद ही इसके भविष्य पर फैसला होगा। यदि असम में यह बिल पारित होता है तो यह देश के अन्य राज्यों में भी UCC की राह खोल सकता है और BJP के राष्ट्रीय एजेंडे को और मजबूती देगा।
