गाज़ीपुर। 30 मई को गाज़ीपुर के युवा व्यवसायी विनीत राय की हत्या के मामले में बुधवार को तीन अलग-अलग कार्रवाइयां हुईं। कोतवाली पुलिस ने महाराजगंज हाईवे के पास से एक और आरोपी अरविंद कुमार (23) को गिरफ्तार किया। वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक वैभव कृष्ण के निर्देश पर पूर्व में दर्ज शिकायतों पर कार्रवाई न करने के आरोप में दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के आदेश पर मुख्य आरोपी कमलेश बिंद की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत की मजिस्ट्रियल जांच के भी आदेश जारी हुए। 8 दिसंबर 2023 से शंकर पांडेय और उसके साथियों के साथ विनीत राय के परिवार की आपसी रंजिश चली आ रही थी और इसी विवाद की परिणति उनकी हत्या के रूप में हुई थी।
हत्याकांड में एक और गिरफ्तारी
कोतवाली पुलिस ने बुधवार शाम 4 बजे महाराजगंज हाईवे के पास से अरविंद कुमार (23 वर्ष) को गिरफ्तार किया। हत्याकांड की जांच के दौरान निकले तथ्यों में अरविंद का नाम सामने आया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उससे गहन पूछताछ शुरू कर दी है। पूछताछ में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अरविंद कुमार की गिरफ्तारी इस पूरे हत्याकांड की जांच में अहम मानी जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि उससे मिलने वाली जानकारी के आधार पर अभी भी फरार चल रहे तीन मुख्य आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। मामले में शंकर पांडेय, आलोक दुबे और सोनू यादव पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित है। तीनों लंबे समय से फरार हैं और पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस पर बड़ी कार्रवाई
विनीत राय के पिता आलोक राय ने 15 जुलाई को वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक वैभव कृष्ण के समक्ष शिकायती प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 8 दिसंबर 2023 से चल रहे आपसी विवाद के दौरान कोतवाली पुलिस को समय-समय पर शिकायतें और स्मरण पत्र दिए गए, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। मुख्य आरोपी शंकर पांडेय पहले से गैंगस्टर एक्ट में नामजद और डी-63 गैंग का सदस्य था, फिर भी उसके खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए गए।
डीआईजी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अपर पुलिस अधीक्षक नगर से प्रारंभिक जांच कराई। जांच में तत्कालीन कोतवाली प्रभारी निरीक्षक दीनदयाल पांडेय और तत्कालीन हल्का प्रभारी उपनिरीक्षक चंद्रशंकर मिश्र अपने पदीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता के दोषी पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद शिकायतों की जांच सरसरी ढंग से की गई और मामलों में अनावश्यक देरी बरती गई। एक पक्ष के खिलाफ ही कार्रवाई की गई जबकि परिवार की शिकायतों को दरकिनार किया जाता रहा।
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जांच आख्या के आधार पर पुलिस उपमहानिरीक्षक वैभव कृष्ण ने पुलिस अधीक्षक गाज़ीपुर डॉ. ईरज राजा को दोनों पुलिसकर्मियों के विरुद्ध तत्काल विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए। निरीक्षक दीनदयाल पांडेय और उपनिरीक्षक चंद्रशंकर मिश्र दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। पुलिस उपमहानिरीक्षक ने स्पष्ट किया कि गाज़ीपुर, जौनपुर और चंदौली में व्यापारियों और आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
मुठभेड़ की मजिस्ट्रियल जांच
इस हत्याकांड के मुख्य आरोपियों में से एक कमलेश चौधरी उर्फ कमलेश बिंद की 3 जून को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। कुर्था गांव के पास घेराबंदी के दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी। जवाबी कार्रवाई में गंभीर रूप से घायल कमलेश को अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने उसके पास से अवैध असलहा और कारतूस बरामद किए थे।
अब इस मुठभेड़ की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के आदेश पर उप जिलाधिकारी सदर विनोद जोशी को मजिस्ट्रियल जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। एसडीएम सदर ने बताया कि इस मामले में मौखिक, लिखित या दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने के इच्छुक कोई भी व्यक्ति 1 अगस्त से 10 अगस्त 2026 तक कार्यदिवसों में कार्यालय अवधि के दौरान उपस्थित होकर अपना पक्ष दर्ज करा सकता है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। यह जांच नियमानुसार हर पुलिस मुठभेड़ के बाद अनिवार्य रूप से कराई जाती है।
तीन आरोपी अभी भी फरार
इस हत्याकांड में नामजद शंकर पांडेय, आलोक दुबे और सोनू यादव अभी भी फरार हैं। तीनों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित है। इससे पहले पुलिस शंकर पांडेय के दो भाइयों और पिता को गिरफ्तार कर चुकी है। गाज़ीपुर न्यायालय ने शंकर पांडेय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश भी जारी किया है। कमलेश बिंद पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है और अब अरविंद कुमार की गिरफ्तारी के साथ जांच का दायरा और विस्तृत हो गया है।
पुलिस उपमहानिरीक्षक ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जो भी व्यक्ति दोषी पाए जाएंगे, चाहे वे अपराधी हों या पुलिसकर्मी, उनके खिलाफ बिना किसी देरी के कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले की जांच विभिन्न स्तरों पर जारी है।



