गाज़ीपुर। गाज़ीपुर कलेक्ट्रेट सभागार में जिला गंगा समिति की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने की। इसमें गंगा में गिर रहे नालों, अधूरी सीवरेज व्यवस्था और बढ़ते जल प्रदूषण पर विस्तार से चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को नाला टैपिंग, सीवरेज विस्तार और जल गुणवत्ता परीक्षण के कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरे करने के निर्देश दिए। गंगा की सफाई के लिए केंद्र सरकार की नमामि गंगे परियोजना पहले से चल रही है। गाज़ीपुर जनपद में गंगा किनारे बसे नगरीय क्षेत्रों से निकलने वाले नाले प्रदूषण की बड़ी वजह बने हुए हैं। इस पृष्ठभूमि में यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
23 नाले कर रहे हैं गंगा को प्रदूषित
समीक्षा के दौरान सामने आया कि गाज़ीपुर नगर पालिका क्षेत्र के कुल 23 नाले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गंगा को प्रभावित कर रहे हैं। अधिकारियों ने माना कि केवल सीवर लाइन बिछाने से यह समस्या हल नहीं होगी। नालों की टैपिंग अनिवार्य होगी। इसके तहत साईं मंदिर घाट से चीतनाथ घाट के बीच गंगा में गिर रहे सात प्रमुख नालों की डीपीआर को तत्काल नए सिरे से तैयार करने के निर्देश दिए गए। प्रस्तावित पंपिंग स्टेशन और पाइपलाइन के लिए भूमि चिन्हित कर शीघ्र प्रस्ताव प्रस्तुत करने को भी कहा गया।
यह भी पढ़ें: शेरपुर-बच्छलपुर पांटून पुल 14 जून से बंद
अमृत योजना की प्रगति और आगे की तैयारी
बैठक में बताया गया कि अमृत योजना के तहत गाज़ीपुर में 105.67 किलोमीटर सीवर नेटवर्क का निर्माण और 10,108 घरों को सीवर कनेक्शन देने का काम पूरा हो चुका है। बावजूद इसके नगर क्षेत्र को 215 किलोमीटर सीवर नेटवर्क और करीब 23,000 घर संयोजनों की जरूरत है। इस कमी को दूर करने के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत ₹286.64 करोड़ की परियोजना शासन को स्वीकृति के लिए भेजी गई है। स्वीकृति मिलते ही काम शुरू कराने की बात कही गई।
सैदपुर नगर पंचायत के आठ नालों की टैपिंग के लिए ₹37.37 करोड़ की परियोजना तैयार कर मुख्यालय भेजी गई है। इसी प्रकार जमानियां नगर पालिका के तीन नालों की टैपिंग के लिए ₹20.42 करोड़ की योजना भी स्वीकृति के लिए भेजी गई है। दोनों परियोजनाओं पर मंजूरी आते ही धरातल पर काम शुरू किया जाएगा। इस प्रकार गाज़ीपुर, सैदपुर और जमानियां — तीनों नगरीय क्षेत्रों में गंगा प्रदूषण नियंत्रण की ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है।
जल गुणवत्ता जांच और बायोरेमेडिएशन पर भी जोर
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन की पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. शेफाली ने गंगा प्रदूषण से जुड़ी शिकायतों और नकारात्मक खबरों के त्वरित निस्तारण की जरूरत पर जोर दिया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि ऐसी शिकायतों का तत्काल समाधान कर जानकारी सोशल मीडिया पर भी साझा की जाए।
यह भी पढ़ें: गाज़ीपुर पंचायत चुनाव मतदाता सूची जारी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नालों के जल की गुणवत्ता की नियमित जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर सभी प्रमुख नालों पर जाली, ग्रिट चैंबर और कचरा अवरोधक लगाने के साथ-साथ बायोरेमेडिएशन के कार्यों को गति देने का निर्णय लिया गया।
जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने कहा — “गंगा की स्वच्छता और अविरलता हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। संबंधित विभाग आपसी समन्वय बनाकर समयबद्ध ढंग से सभी कार्य पूरे करें, ताकि गंगा में प्रदूषण का प्रवाह रोका जा सके।”

