गाज़ीपुर। जून 2026 में जनपद की अदालतों ने आपराधिक मामलों में सख्त रुख अपनाया। भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत 58 वादों के निस्तारण में 11 अभियुक्तों को सजा हुई जबकि गहमर के एक हत्या मामले में मृत्युदंड और तीन POCSO मामलों में 10-10 वर्ष की सजा सुनाई गई। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई अभियोजन समीक्षा बैठक में यह आंकड़े सामने आए।
हत्या और दहेज उत्पीड़न में कठोर सजा
जून माह में जनपद की अदालतों ने कई गंभीर मामलों में कठोर निर्णय सुनाए। थाना गहमर के धारा 302 के तहत स्टेट बनाम अमजद खान वाद में एडीजे प्रथम गाज़ीपुर ने 11 जून 2026 को अभियुक्त को मृत्युदंड से दंडित किया। इस वाद में श्री अखिलेश सिंह, एडीजीसी ने कुशल पैरवी की।
दहेज उत्पीड़न और दहेज मृत्यु के दो अलग-अलग मामलों में सत्र न्यायालय गाज़ीपुर ने 10-10 वर्ष के कारावास और ₹10,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई। थाना मुहम्मदाबाद के वाद में धारा 498ए, 304बी और डीपी एक्ट के अंतर्गत 12 जून 2026 को अभियुक्त पवन कुमार को और थाना नोनहरा के वाद में 16 जून 2026 को अभियुक्त मुस्ताक खान उर्फ मउर को सजा सुनाई गई। दोनों वादों में श्री कृपाशंकर राय, डीजीसी ने पैरवी की।
थाना बरेसर के धारा 302 और आर्म्स एक्ट के तहत स्टेट बनाम कमलेशी देवी वाद में 10 जून 2026 को अभियुक्त को 10 वर्ष का कठोर कारावास और ₹2,000 का जुर्माना लगाया गया। इस वाद में श्री अखिलेश सिंह, एडीजीसी ने पैरवी की।
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POCSO मामलों में दस साल की सजा
जून माह में POCSO न्यायालय गाज़ीपुर ने तीन अलग-अलग मामलों में नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वाले दोषियों को कठोर सजा सुनाई।
थाना खानपुर के धारा 363, 366, 376 और POCSO एक्ट के तहत 06 जून 2026 को अभियुक्त गौतम को और थाना दुल्लहपुर के वाद में 09 जून 2026 को अभियुक्त आकाश गौंड़ को 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। थाना रेवतीपुर के धारा 354, 323 और POCSO एक्ट के तहत 05 जून 2026 को अभियुक्त बोदा सिंह उर्फ भोला सिंह को 04 दिन के कारावास की सजा दी गई। तीनों वादों में श्री रविकांत पांडेय और श्री प्रभुनारायण सिंह, विशेष लोक अभियोजक ने पैरवी की।
गवाह परीक्षण और जमानत की समीक्षा
बैठक में सम्मन और वारंट की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जून माह में कुल 331 सम्मन और वारंट निर्गत किए गए जिनके सापेक्ष 238 तामिल कराए गए। तामिल वारंट के सापेक्ष 185 गवाह उपस्थित हुए जिनमें से 172 गवाहों को न्यायालय के समक्ष परीक्षित कराया गया। 13 गवाह पी.ओ. के अवकाश और अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण परीक्षित नहीं हो सके।
सत्र न्यायालयों में कुल 328 सम्मन निर्गत हुए जिनके सापेक्ष 281 तामिल हुए। तामिला के सापेक्ष 252 गवाह उपस्थित हुए जिनमें से 232 गवाह परीक्षित हुए और 20 गवाह हड़ताल और पी.ओ. के अवकाश के कारण परीक्षित नहीं हो सके। जमानत प्रार्थना पत्रों की समीक्षा में सामने आया कि जून माह में अवर न्यायालय में कुल 145 जमानत प्रार्थना पत्र दायर हुए जिनमें से 79 स्वीकृत और 66 अस्वीकृत हुए।
अपर जिलाधिकारी (भू.रा.) ने जिला शासकीय अधिवक्ता और लोक अभियोजकों को निर्देश दिए कि रिहा हुए अभियुक्तों के वादों की पुनः समीक्षा की जाए और जहां शासकीय हित में आवश्यक हो वहां पुनः अपील का प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत किया जाए। पक्षद्रोही गवाहों पर मुकदमा कर सजा दिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
सभी अभियोजकों को निर्देशित किया गया कि प्रत्येक माह कम से कम एक वाद की केस डायरी तैयार की जाए जिसमें पुलिस विवेचना में हुई कमियों और त्रुटियों को नोट किया जाए ताकि भविष्य में सुधार हो और स्टेट के पक्ष में अधिक से अधिक वादों का निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।


