गाज़ीपुर। जनपद की विशेष न्यायाधीश पॉक्सो प्रथम रामअवतार प्रसाद की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी आकाश गोंड़ को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अर्थदंड की राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा पीड़िता को दिया जाए। यह फैसला वर्ष 2018 में दर्ज मामले में करीब 8 वर्ष की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आया है।
क्या था मामला
यह मामला दुल्लहपुर थाना क्षेत्र का है। 8 जुलाई 2018 को आरोपी आकाश गोंड़ ने 16 वर्षीय नाबालिग बालिका को शादी का झांसा देकर नासिक भगा ले गया। वहां उसने 25 दिनों तक पीड़िता के साथ लगातार दुष्कर्म किया। पुलिस के दबाव बनाने पर आरोपी पीड़िता के साथ खुद हाजिर हुआ। पुलिस ने तत्काल आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 363, 366, 376 और 3/4 POCSO एक्ट के तहत आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की विवेचना में पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण आधार बने।
पांच गवाहों की गवाही — अभियोजन पक्ष का मजबूत केस
अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रभुनारायण सिंह ने न्यायालय में पांच गवाहों को पेश किया। सभी गवाहों ने अभियोजन पक्ष के कथानक का पूरी तरह समर्थन किया। गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ ठोस मामला प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की विस्तृत बहस सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश रामअवतार प्रसाद ने आरोपी आकाश गोंड़ को दोषी पाते हुए सजा सुनाई। अदालत ने दोषी को तत्काल जेल भेजने का आदेश भी दिया।
पीड़िता को मिलेगा अर्थदंड का हिस्सा
इस मामले में अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश यह भी दिया कि 40 हजार रुपये के अर्थदंड में से 50 प्रतिशत यानी 20 हजार रुपये सीधे पीड़िता को दिए जाएंगे। यह प्रावधान पॉक्सो मामलों में पीड़ितों के पुनर्वास और सहायता की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। विशेष लोक अभियोजक प्रभुनारायण सिंह ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने इस मामले को पूरी मजबूती के साथ अदालत में रखा और न्याय सुनिश्चित कराया।
पॉक्सो एक्ट — बच्चों का सुरक्षा कवच
पॉक्सो एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act) को वर्ष 2012 में बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षित करने के लिए बनाया गया था। इस कानून के तहत नाबालिगों के साथ किसी भी प्रकार के यौन अपराध पर कठोर सजा का प्रावधान है। इस कानून की खासियत यह है कि इसमें पीड़ित बच्चे की पहचान गोपनीय रखी जाती है और मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत में होती है। गाज़ीपुर की पॉक्सो अदालत का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि नाबालिगों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले चाहे कहीं भी छिपें, कानून उन तक अवश्य पहुंचता है।


