📌 अमित मणि त्रिपाठी
देवरिया। होर्मुज जलडमरूमध्य में बुधवार को एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले में देवरिया जिले के सुरौली थाना क्षेत्र के सिरोली गांव के निवासी शिवानंद चौरसिया (38) की मौत हो गई। शिवानंद उस जहाज पर इंजन फिटर के पद पर कार्यरत थे। बृहस्पतिवार की सुबह दुबई में रहने वाले उनके छोटे भाई रामप्रवेश चौरसिया ने घर फोन कर परिजनों को इसकी सूचना दी। खबर मिलते ही सिरोली गांव में मातम पसर गया।
जानकारी के अनुसार बुधवार को ओमान तट के पास अमेरिका ने एक मालवाहक जहाज पर हमला किया। जहाज पर 24 भारतीय क्रू मेंबर सवार थे। इनमें से 21 को बचा लिया गया जबकि तीन लापता हो गए। लापता कर्मचारियों में शिवानंद चौरसिया भी शामिल थे। बाद में उनकी मौत की पुष्टि हुई।
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5 दिसंबर को निकले थे घर से, ईरान जा रहा था जहाज
पिता रामजी चौरसिया ने बताया कि शिवानंद 5 दिसंबर 2025 को मालवाहक जहाज में सवार होकर मुंबई से सिंगापुर के लिए रवाना हुए थे। इसके बाद उनका जहाज चीन और ओमान होते हुए ईरान की ओर जा रहा था। बुधवार को होर्मुज क्षेत्र में हुए हमले में वह मारे गए।
शिवानंद करीब दो वर्ष पहले रोजगार के लिए घर से निकले थे। समुद्री जहाज पर नौकरी पाने के लिए काफी धन की आवश्यकता थी। गरीब परिवार से होने के कारण उन्होंने दो साल तक कठिन परिश्रम कर एक-एक रुपया जोड़कर अपना सपना पूरा किया। जब 5 दिसंबर 2025 को पहली बार उन्होंने समुद्री जहाज पर कदम रखा तो घर फोन कर मां कमलावती देवी और पत्नी सुशीला देवी से खुशी साझा की थी।
पत्नी से आखिरी बार हुई थी सोमवार रात बात
पत्नी सुशीला देवी ने बताया कि सोमवार की रात शिवानंद का फोन आया था। उस समय वह अपने बेटे राजवीर और बेटी वानिकी को सुला रही थीं। नेटवर्क की समस्या के कारण कुछ ही सेकंड में फोन कट गया। उसके बाद फिर बात नहीं हो सकी। शिवानंद के वही आखिरी शब्द — “कैसी हो तुम, घर में सब ठीक तो है, बच्चे सो गए?” — अब सुशीला के लिए आखिरी याद बनकर रह गए हैं। मौत की खबर मिलते ही सुशीला बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ीं। मां कमलावती का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता रामजी सदमे में हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस बल भी गांव पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया।
बेटे के अंतिम दर्शन को तरस रहा परिवार
शिवानंद का एक ही सपना था — परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरे, बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ें और माता-पिता व पत्नी को किसी चीज की कमी न हो। परिजनों के अनुसार उन्होंने घर को आखिरी बार फोन पर कहा था — “उसने कहा था, अब हमारी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।” परिवार के लोगों का कहना है कि एक झटके में जीवन की सारी खुशियां छिन गई हैं।
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पिता रामजी चौरसिया बेटे के अंतिम दर्शन की प्रतीक्षा में हैं। दरवाजे पर शिवानंद के दोनों बच्चों को संभालते हुए रामजी ने कहा कि जिस बेटे को गोद में खेलाया और अंगुली पकड़कर चलना सिखाया, आज उसी के शव के आने की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। गांव में शोक की लहर है। हर कोई शिवानंद के संघर्ष को याद कर भावुक हो रहा है। उनकी मौत ने न सिर्फ एक परिवार का सहारा छीना, बल्कि कई अधूरे सपनों को भी दफन कर दिया।
शिवानंद के पिता रामजी चौरसिया ने मांग की कि उनके बेटे का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द घर लाया जाए ताकि परिवार अंतिम संस्कार कर सके। उन्होंने यह भी मांग की कि परिवार की एकमात्र कमाई शिवानंद ही थे, इसलिए सरकार उनकी बहू को नौकरी दे। पत्नी सुशीला रोते हुए बोलीं — “यह सरकार की कैसी लापरवाही है कि लोगों की जान चली जा रही है। हमारे पति को वापस लाइए।” गांव के पड़ोसियों ने बताया कि होर्मुज में हुई तीन मौतों में से एक मृतक के परिजनों को हिमाचल सरकार ने ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता दी है। ग्रामीणों ने योगी सरकार से भी इस परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।



