नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को आगामी श्री अमरनाथ जी यात्रा की सुरक्षा और तैयारियों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों (CAPFs) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस वर्ष यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होकर 9 अगस्त 2026 तक चलेगी। बैठक में यात्रा मार्ग की सुरक्षा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा की गई। गृह मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
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मल्टी लेयर सुरक्षा ग्रिड और सीआरपीएफ की तैयारी
बैठक में निर्देश दिए गए कि यात्रा मार्ग पर जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों (CAPFs) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मल्टी लेयर सुरक्षा ग्रिड स्थापित किया जाए। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पोर्टेबल RCIED जैमर, डीप सर्च मेटल डिटेक्टर, विस्फोटक पहचान उपकरण और CCTV सिस्टम तैनात किए हैं। यात्रा मार्ग पर काम करने वाले श्रमिकों और विक्रेताओं के सत्यापन के लिए QR कोड आधारित ‘पहचान ऐप’ शुरू किया गया है। इस ऐप के जरिए कर्मचारियों और व्यापारियों का डिजिटल सत्यापन होगा जिससे सुरक्षा और जवाबदेही बढ़ेगी। किरायेदार सत्यापन अभियान, आवास केंद्रों की जांच और खुफिया गतिविधियां भी तेज कर दी गई हैं।
सीआरपीएफ महानिदेशक जी.पी. सिंह ने हाल ही में कश्मीर घाटी का दौरा कर बालटाल मार्ग और बेस कैंप की सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को सतर्कता बढ़ाने और सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। आधुनिक निगरानी तकनीक, खुफिया तंत्र और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को इस वर्ष और मजबूत किया गया है। सुरक्षा बलों, प्रशासन और अन्य एजेंसियों के बीच लगातार तालमेल बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
गृह मंत्री के प्रमुख निर्देश
गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। श्रद्धालुओं के पंजीकरण की प्रक्रिया व्यवस्थित और पारदर्शी रखने को कहा गया। आवास और भोजन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और पर्याप्त चिकित्सा दल तैनात करने पर जोर दिया गया। साथ ही आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह सक्रिय रखने और मौसम की स्थिति के अनुसार ही श्रद्धालुओं के जत्थों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए। यात्रा से जुड़े सभी पहलुओं की नियमित निगरानी करने के भी आदेश दिए गए।
दो मार्गों से होती है यात्रा, 57 दिन चलेगी
यह 57 दिनों तक चलने वाली यात्रा हिमालय में समुद्र तल से लगभग 3,880 मीटर (करीब 12,756 फीट) की ऊंचाई पर स्थित बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा तक पहुंचती है। श्रद्धालु दो मार्गों का उपयोग कर सकते हैं — पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा पहलगाम मार्ग (अनंतनाग) और 14 किलोमीटर लंबा बालटाल मार्ग (गांदरबल)। बालटाल मार्ग छोटा जरूर है लेकिन अधिक कठिन माना जाता है। यात्रा का मुख्य आकर्षण गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस कठिन यात्रा पर निकलते हैं।
यात्रा के लिए 13 वर्ष से 70 वर्ष तक की आयु के श्रद्धालु पात्र हैं। अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (CHC) के बिना यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। पूर्व पंजीकरण अनिवार्य है। 6 सप्ताह से अधिक गर्भवती महिलाओं और गंभीर हृदय, श्वास या अन्य बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को चिकित्सकीय सलाह के बिना यात्रा नहीं करनी चाहिए।
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यात्रा के लिए जरूरी सामान और उपराज्यपाल की भूमिका
यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा परमिट, पंजीकरण स्लिप, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, गर्म कपड़े, रेनकोट, ट्रैकिंग जूते और नियमित दवाइयां साथ रखनी होंगी। आपातकालीन संपर्क नंबरों की सूची भी हमेशा पास रखें। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा लगातार अमरनाथ यात्रा की तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और श्राइन बोर्ड के बीच समन्वय स्थापित कर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच लगातार तालमेल बनाया जा रहा है।



