लखनऊ। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रमुख को “चिरकुट टाइप के छोटे नेता” कहे जाने पर सियासी विवाद तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इस पर तीखा पलटवार किया है। यह विवाद मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच जारी खींचतान के बीच सामने आया है। अखिलेश यादव ने कांग्रेस पर धोखा देने का आरोप लगाया है।
अजय राय का पलटवार
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने अखिलेश के बयान पर जवाब देते हुए कहा कि जनता के सामने सब स्पष्ट है कि भाजपा के साथ कौन खड़ा है। उन्होंने याद दिलाया कि घोसी उपचुनाव में कांग्रेस ने सपा को समर्थन दिया था और सपा उम्मीदवार विजयी रहा। वहीं उत्तराखंड के बागेश्वर उपचुनाव में सपा ने अपना उम्मीदवार उतारा जिससे भाजपा जीती और कांग्रेस हारी।
राय ने कहा कि अगर अखिलेश सच में भाजपा को हराना चाहते हैं तो उन्हें कांग्रेस को समर्थन देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में भी यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन भाजपा की मदद कर रहा है — चाहे प्रत्यक्ष रूप से हो या परोक्ष रूप से।
अखिलेश का कांग्रेस पर आरोप
इससे पहले गुरुवार को अखिलेश यादव ने कहा था कि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में गठबंधन को लेकर दिए गए आश्वासन से मुकर गई। उन्होंने कहा — “अगर पता होता कि इंडिया गठबंधन विधानसभा स्तर पर सीट नहीं देगा तो हम अपने नेताओं को वार्ता के लिए नहीं भेजते।”
अखिलेश ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं दिग्विजय सिंह और कमलनाथ ने सपा नेताओं से रात के एक-एक बजे तक चर्चा की। सपा के आंकड़े देखकर उन्होंने छह सीटों का आश्वासन दिया लेकिन जब उम्मीदवारों की सूची जारी हुई तो सपा को एक भी सीट नहीं दी गई। अखिलेश ने कहा कि इस धोखे का असर उत्तर प्रदेश और केंद्रीय गठबंधन की भविष्य की बातचीत पर भी पड़ेगा।
“चिरकुट” वाला बयान
अखिलेश यादव ने गुरुवार को यह भी कहा था कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की पार्टी में कोई हैसियत नहीं है और वे पटना व मुंबई जैसी महत्वपूर्ण इंडिया गठबंधन बैठकों में भी शामिल नहीं थे। अखिलेश ने कांग्रेस से अपील करते हुए कहा कि “चिरकुट टाइप के छोटे नेताओं” से सपा के लिए बयान न दिलवाए जाएं।
गठबंधन में दरार के संकेत
इस पूरे विवाद ने इंडिया गठबंधन के भीतर आपसी तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस और सपा दोनों एक ही गठबंधन के सदस्य हैं लेकिन मध्य प्रदेश में सीट बंटवारे को लेकर उनके रिश्ते तल्ख हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों दलों के बीच बातचीत के कई दौर हुए लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई। अब दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ने की स्थिति में हैं जिससे भाजपा को फायदा मिलने की आशंका जताई जा रही है।



