नई दिल्ली। विपक्षी इंडिया जनबंधन गठबंधन की एक अहम बैठक सोमवार 8 जून 2026 को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में दोपहर 12 बजे से आयोजित हुई। यह गठबंधन के गठन के करीब तीन साल बाद हुई पहली बड़ी औपचारिक बैठक थी। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यह पहला मौका था जब इतनी बड़ी संख्या में विपक्षी नेता एक मंच पर जुटे। हाल के विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में TMC की हार और तमिलनाडु में DMK की पराजय के बाद गठबंधन के लिए यह बेहद कठिन दौर था। हालांकि केरल में Congress-नेतृत्व वाले UDF ने सरकार बनाने में सफलता पाई थी। इस पृष्ठभूमि में यह बैठक गठबंधन की एकजुटता और भविष्य की दिशा तय करने के लिहाज से निर्णायक मानी जा रही थी। बैठक में 25 विपक्षी दलों के नेता एक छत के नीचे जुटे और भावी रणनीति पर गहन मंथन किया।
कौन-कौन रहे मौजूद
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल हुए। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी अपने भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ पहुंचीं।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और वामपंथी दलों के नेता जॉन ब्रिटास, दीपांकर भट्टाचार्य और पी संतोष कुमार भी बैठक में उपस्थित रहे। शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे और जेएमएम के हेमंत सोरेन ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया जबकि एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले भी बैठक में मौजूद रहीं।
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DMK और AAP रहे अनुपस्थित
बैठक में दो बड़े दलों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी। डीएमके तमिलनाडु की हालिया राजनीतिक परिस्थितियों के कारण बैठक से दूर रहा। आम आदमी पार्टी भी इस बार बैठक में शामिल नहीं हुई। हालांकि शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत ने कहा कि पार्टी इंडिया गठबंधन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आगे भी रहेगी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि पहले 23 दलों ने बैठक में भाग लेने की सहमति दी थी, लेकिन बैठक के दिन 25 दल एक मंच पर आए। आगे उन्होंने कहा कि भारत जिस तरह अपनी विविधता के बावजूद एकसूत्र में बंधा है, उसी भावना के साथ इंडिया जनबंधन भी आगे बढ़ता रहेगा।
खरगे बोले — आर्थिक माहौल बेहद नकारात्मक
बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश का आर्थिक माहौल बेहद नकारात्मक है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए निवेश उस गति से नहीं आ रहे जितनी रोजगार सृजन के लिए आवश्यक है। खरगे ने कहा कि केंद्र सरकार देश की गंभीर आर्थिक चुनौतियों से आंखें मूंदे बैठी है।
खरगे ने यह भी कहा कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही विफलताओं से लाखों युवाओं की आकांक्षाएं कुचली जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कमजोर वर्गों पर अत्याचार बेरोकटोक जारी है। NEET-CBSE परीक्षा विवाद को उन्होंने केंद्र सरकार की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक बताया।
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पांच बड़े फैसले
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में खरगे ने बताया कि गठबंधन ने पांच अहम निर्णय लिए। पहला, भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित “वोट लूट” का मामला उठाया जाएगा। दूसरा, NEET-CBSE परीक्षा विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की गई।
तीसरा, केंद्र सरकार से देश की नाजुक आर्थिक स्थिति पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की गई। चौथा, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों और वंचित वर्गों के मुद्दों को संसद से सड़क तक प्रमुखता से उठाने का संकल्प लिया गया। पांचवां, 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए मिलकर रणनीति तैयार करने पर सभी दलों ने सहमति जताई। खरगे ने कहा कि सभी नेताओं ने खुलकर अपने विचार रखे और गठबंधन में एकजुटता की भावना मजबूत हुई है।

