लखनऊ, 27 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में किसानों की आय बढ़ाने, कंपनियों के विलय पर स्टांप ड्यूटी तय करने और जल परिवहन को व्यवस्थित करने से जुड़े फैसले लिए गए। बैठक में शिक्षा कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने और चार लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
पशुपालन पर सरकार का जोर
सरकार पशुपालन को ग्रामीण क्षेत्रों में कमाई और रोजगार का जरिया बनाने के लिए मिशन गठित करने की तैयारी में है। इसके तहत पशुओं की नस्ल और उत्पादकता सुधारने के साथ दूध, अंडे, ऊन तथा मछली जैसे उत्पादों के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था विकसित करने की योजना है। प्रस्ताव में गायों की दूध देने की क्षमता बढ़ाकर प्रति दिन 10 लीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा मुर्गी और बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए भी सहायता देने की बात शामिल है। पशु बीमा की कुल लागत का 85 प्रतिशत सरकार और बाकी 15 प्रतिशत किसान देंगे। प्रस्ताव में एक गाय के लिए 50 हजार रुपये का अनुदान भी रखा गया है। मिशन के जरिए पशुपालन से जुड़े कारोबार को बढ़ाने और पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देने की योजना है।
कंपनी विलय पर स्टांप शुल्क
प्रदेश में कंपनियों के विलय (मर्जर) और विभाजन (डी-मर्जर) पर स्टांप शुल्क की दर तय करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत शेयरों के मूल्य पर 0.50 प्रतिशत स्टांप शुल्क लगेगा। विलय या विभाजन में संपत्ति शामिल होने पर उस पर 2 प्रतिशत शुल्क देना होगा। कंपनी का पंजीकरण और आरओसी की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद यह रकम जमा करनी होगी।
स्टांप मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि अब तक इस विषय पर स्पष्ट व्यवस्था न होने से उद्यमी असमंजस में रहते थे। कई मामलों में उनसे सर्किल रेट के बराबर शुल्क मांगा जाता था। आगे उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और गुजरात में यह व्यवस्था पहले से लागू है। यह विषय समवर्ती सूची में आता है, इसलिए इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी लेनी होगी।
अब नौकाओं का होगा पंजीकरण
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि मोटर चालित नावों और जहाजों को लेकर अब तक कोई स्पष्ट नियम नहीं था। अब इन नावों के साथ बिना मोटर वाली नावों का भी पंजीकरण कराया जाएगा। जल परिवहन की निगरानी के लिए इनलैंड वाटर अथॉरिटी का गठन होगा, जिसके अध्यक्ष खुद परिवहन मंत्री होंगे। नावों के पंजीकरण और निगरानी की जिम्मेदारी तहसील स्तर के अधिकारियों, आरआई और एआरटीओ प्रशासन को दी जाएगी।
यात्रियों की संख्या के आधार पर नावों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा: 10 सवारी वाली मोटर नाव, 5 से 10 सवारी वाली नाव और 5 सवारी तक की नाव। यात्री न ढोने वाली नावों के पंजीकरण पर 50 रुपये शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। यात्रियों और नाविकों को बीमा कवर मिलेगा और हर नाव व नाविक का ब्योरा दर्ज किया जाएगा। यह व्यवस्था गंगा और यमुना समेत 11 नदियों पर लागू होगी।
कर्मचारियों को कैशलेस इलाज
अब शिक्षा से जुड़े गैर-शिक्षक कर्मचारियों का भी कैशलेस इलाज होगा। इस सुविधा का फायदा कुल 48,062 गैर-शिक्षक स्टाफ को होगा। वित्तविहीन स्कूलों में 22,541, सहायता प्राप्त अशासकीय स्कूलों में 23,989 और संस्कृत स्कूलों में करीब 110 कर्मचारी हैं। प्रति कर्मचारी 3,000 रुपये प्रीमियम तय हुआ है, जिस पर 14.41 करोड़ का खर्च आएगा। कर्मचारी और उसके परिवार का 5 लाख रुपये तक का इलाज कैशलेस होगा।
बेसिक शिक्षा से जुड़े 1,22,305 कर्मचारी भी इस सुविधा के दायरे में आएंगे, इसका प्रस्ताव पास हो गया। इनमें क्लर्क, चतुर्थ श्रेणी के कर्मी, जिला परियोजना का स्टाफ और बिना सरकारी सहायता वाले संस्थानों के कर्मचारी हैं। मैनपुरी के सैनिक स्कूल के विस्तार हेतु ग्रामीण इलाके में मुफ्त जमीन देने को भी मंजूरी मिली। स्कूल की शुरुआत 22 जुलाई 2019 को हुई थी।
चार लिंक एक्सप्रेसवे और निवेश
उत्तर प्रदेश में चार लिंक एक्सप्रेसवे बनाने की योजना पर कैबिनेट ने सहमति दी है। इन परियोजनाओं पर 17,542 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। निर्माण कार्य इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मॉडल पर कराया जाएगा और इन्हें तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजनाओं में फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के दो पैकेज शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 90 किलोमीटर होगी। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला लिंक मार्ग भी बनाया जाएगा। इसके अलावा झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के दो पैकेजों की कुल लंबाई 106 किलोमीटर और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई 74 किलोमीटर होगी।
निर्माण कंपनियों को एक्सप्रेसवे तैयार करने के बाद पांच साल तक उनका रखरखाव भी करना होगा। बैठक में निवेश से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। ग्रेटर नोएडा में एकागो हॉस्पिटेलिटी के 654 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को स्वीकृति मिली। वहीं, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) नीति के तहत चार कंपनियों के लिए लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने पर सहमति बनी। इनमें हैवेल्स के 889 करोड़ रुपये, अमेरियोराइड इंडिया एलएलपी के 112 करोड़ रुपये, मेटलाइफ ग्लोबल के 84 करोड़ रुपये और एलजी सॉफ्ट के 634 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं।

