लखनऊ, 30 सितंबर। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के राजनीति में उतरने के फैसले पर कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सवाल उठाए हैं। एक टीवी इंटरव्यू में राजभर ने प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आने के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति में सिर्फ पद या प्रशासनिक अनुभव काफी नहीं होता, बल्कि लोगों के बीच लगातार काम करना पड़ता है।
राजनीति में आने पर उठाए सवाल
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि मौजूदा समय में आर्थिक रूप से सक्षम लोग भी राजनीति में आने की इच्छा रखते हैं। दिव्या मित्तल के संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि उन्होंने काफी पैसा कमाया होगा और इसी वजह से अब राजनीति में आने का फैसला किया है। राजभर ने इस दौरान उनके प्रशासनिक अनुभव और चुनावी राजनीति के बीच अंतर भी बताया।
उनके मुताबिक आईएएस अधिकारी के तौर पर काम करने और चुनाव जीतकर विधायक बनने की प्रक्रिया अलग है। चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी को क्षेत्र में लोगों से संपर्क करना पड़ता है, उनकी समस्याएं सुननी पड़ती हैं और उनके काम कराने के लिए प्रयास करना पड़ता है। राजभर ने कहा कि जनता के बीच जाकर राजनीतिक आधार तैयार करना आसान नहीं है।
सपा में जाने का दावा
दिव्या मित्तल ने 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा दिया है। 29 सितंबर को वीडियो संदेश जारी कर उन्होंने राजनीति में आने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि वह ऐसे लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी समस्याएं सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पातीं या वहां पहुंचने के बाद भी उनकी सुनवाई नहीं होती।
दिव्या मित्तल ने अभी किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है। हालांकि, उनके बयान को लेकर राजभर ने दावा किया कि वह समाजवादी पार्टी में जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि दिव्या की मंशा सपा के साथ राजनीति करने की है। इसी दौरान राजभर ने उनके फैसले पर तंज कसते हुए ‘पैसे की गर्मी’ की बात भी कही।
रैली को लेकर चुनौती
राजभर ने दिव्या मित्तल के राजनीतिक जनाधार को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश के किसी भी एक जिले में रैली करके देख लें, तब उन्हें राजनीतिक स्थिति का अंदाजा हो जाएगा। राजभर ने कहा कि राजनीति के मैदान में उतरने के बाद ही दोनों के बीच मुकाबला होगा।
अपने राजनीतिक सफर का उदाहरण देते हुए राजभर ने कहा कि उन्होंने 14 साल तक संघर्ष किया और शून्य से शुरुआत की। उन्होंने बिहार के एक डीजीपी का उदाहरण भी दिया, जिसने इस्तीफा देकर विधायक बनने की कोशिश की थी। राजभर के मुताबिक चुनावी राजनीति में सफलता नहीं मिलने के बाद वह वापस लौट गए।

