📌 अमित मणि त्रिपाठी
देवरिया। पुलिस अधीक्षक देवरिया अभिजीत आर. शंकर के नेतृत्व में जनपद में अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत 30 मई 2026 को थाना गौरीबाजार पुलिस ने एक अहम कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस टीम ने थाना क्षेत्र के डंबर भिष्वा गांव में दबिश देकर सिविल जज एफटीसी प्रथम देवरिया के न्यायालय में दर्ज एक पुराने मुकदमे में वांछित 5 वारंटियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं — जो लंबे समय से फरार चल रहे थे।
क्या है पूरा मामला
यह मामला सिविल जज एफटीसी प्रथम देवरिया के न्यायालय में दर्ज मुकदमा संख्या 9747/2023 से जुड़ा है। मुकदमे में भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (मारपीट), धारा 452 (घर में जबरन घुसकर मारपीट) और धारा 427 (संपत्ति को नुकसान) के तहत मामला दर्ज है। सभी पांचों आरोपी लंबे समय से न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए फरार चल रहे थे और पुलिस इनकी तलाश में थी।
कैसे हुई कार्रवाई
अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी आनन्द कुमार पाण्डेय के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी रुद्रपुर सतेन्द्र कुमार राय के पर्यवेक्षण में थाना गौरीबाजार पुलिस टीम ने 30 मई की सुबह डंबर भिष्वा में दबिश दी। दबिश के दौरान सभी पांचों वारंटी घर पर मौजूद मिले। गिरफ्तारी का कारण बताते हुए उन्हें हिरासत में लेकर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई।
गिरफ्तार वारंटियों का विवरण
गिरफ्तार पांचों आरोपी डंबर भिष्वा, थाना गौरीबाजार, जनपद देवरिया के निवासी हैं।
- जोखन — पुत्र स्व. शेषनाथ निषाद, उम्र 59 वर्ष
- लालमुनी निषाद — पुत्र स्व. शेषनाथ निषाद, उम्र 52 वर्ष
- बृन्दा देवी — पत्नी लालमुनी निषाद, उम्र करीब 50 वर्ष
- शान्ति देवी — पत्नी नरसिंह निषाद, उम्र करीब 43 वर्ष
- तारा देवी — पत्नी जोखन निषाद, उम्र करीब 59 वर्ष
गौरतलब है कि गिरफ्तार आरोपियों में से जोखन और लालमुनी निषाद सगे भाई हैं। तीनों महिला आरोपी इन्हीं के परिवार की सदस्य हैं।
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धाराएं क्या कहती हैं
- धारा 323 — मारपीट से संबंधित है। जब कोई जानबूझकर किसी को चोट पहुंचाता है।
- धारा 452 — घर में जबरन घुसकर मारपीट करना। घर की सुरक्षा और निजता के उल्लंघन को गंभीरता से लेती है।
- धारा 427 — संपत्ति को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना।
तीनों धाराओं का एक साथ लगना दर्शाता है कि यह महज झगड़े का मामला नहीं था — बल्कि घर में घुसकर मारपीट और तोड़फोड़ की घटना थी।
वारंट का मतलब क्या होता है
न्यायालय द्वारा जारी वारंट एक आधिकारिक आदेश होता है जिसके तहत पुलिस को किसी आरोपी को गिरफ्तार करने का अधिकार दिया जाता है। जब कोई आरोपी बार-बार कोर्ट में पेश नहीं होता तो न्यायालय वारंट जारी करता है। इस मामले में सभी पांचों आरोपी 2023 से लगातार न्यायालय की अनदेखी करते रहे — जो कानून की गंभीर अवमानना है।
अभियान जारी
पुलिस अधीक्षक देवरिया अभिजीत आर. शंकर के निर्देशन में जनपद में वारंटियों और फरार अपराधियों के विरुद्ध विशेष अभियान लगातार जारी है। इस अभियान के तहत अब तक कई वांछित अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि कोई भी वारंटी कानून से नहीं बच सकता — चाहे वह कितने भी समय से फरार क्यों न हो।
