नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गुरुवार को जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक के धरना स्थल पर पहुंचे। NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर चल रहे युवा आंदोलन और वांगचुक के अनशन को समर्थन देते हुए उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह प्रस्ताव दिया कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया जाए। इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर प्रतिदिन क्लीनिकल मॉनिटरिंग का आदेश दिया।
केजरीवाल जंतर मंतर पहुंचे
गुरुवार को अरविंद केजरीवाल ने जंतर मंतर पर युवा प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
केजरीवाल ने केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा कि युवाओं की आवाज और सोनम वांगचुक की बात सुनिए। उन्होंने कहा — “यदि सरकार ने इस आंदोलन को नजरअंदाज किया तो तीन साल बाद आगामी चुनावों में वही हश्र होगा जो 2014 में तत्कालीन सरकार का हुआ था।”
केजरीवाल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा मांगते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना अब अनिवार्य हो गया है। गुरुवार को सोनम वांगचुक के अनशन का 19वां दिन था।
यह भी पढ़ें: सपा सांसद डिंपल यादव जंतर मंतर पहुंचीं — वांगचुक को दिया समर्थन
सोनम को मंत्री बनाने का प्रस्ताव
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अनोखा प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा — “मेरा प्रधानमंत्री को सुझाव है कि धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाया जाए और लद्दाख के पर्यावरणविद एवं शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया जाए।”
सोनम वांगचुक की मुख्य मांगें हैं — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता। NEET-UG 2026 में धांधली और पेपर लीक के आरोपों के बाद देशभर के छात्र आंदोलित हैं।
केजरीवाल ने कहा कि युवाओं का भविष्य दांव पर है और केंद्र सरकार की चुप्पी इस मामले में स्वीकार्य नहीं है।
हाई कोर्ट का बड़ा आदेश
सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने इस पर सुनवाई की।
अदालत ने कहा — “हर नागरिक का जीवन अनमोल है और सरकार को इसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए।” कोर्ट ने आदेश दिया कि जंतर मंतर पर वांगचुक के स्वास्थ्य की प्रतिदिन क्लीनिकल मॉनिटरिंग की जाए। यदि सरकारी डॉक्टरों की राय में मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़े तो बिना किसी देरी के चिकित्सा सुविधा दी जाए।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकारी डॉक्टरों की टीम पहले से ही प्रतिदिन वांगचुक की निगरानी कर रही है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीम भी तैनात की जा सकती है। कोर्ट ने सरकार का आश्वासन मिलने के बाद PIL का निपटारा कर दिया।

