लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और पारिश्रमिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार 9 जून 2026 को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) की कार्यप्रणाली एवं प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ शब्दों में कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी और कर्मियों के हित में संचालित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि कर्मचारियों के हितों का संरक्षण हो और विभागों को भी सुव्यवस्थित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके। बैठक में यूपीकॉस की वर्तमान स्थिति, एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल की प्रगति और आउटसोर्स एजेंसियों के एम्पैनलमेंट की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई।
यूपीकॉस — क्यों हुई स्थापना
उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) की स्थापना विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया, सेवा शर्तों और मानदेय व्यवस्था में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से की गई थी। इससे पहले अलग-अलग विभागों में आउटसोर्स कर्मियों की सेवा शर्तें और वेतन अलग-अलग होते थे जिससे कर्मचारियों में असंतोष रहता था। अब यूपीकॉस के प्रभावी होने से इन सभी प्रक्रियाओं में एकरूपता आएगी और यह सुनिश्चित होगा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन और अन्य सुविधाएं मिलें।
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मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो न केवल सरकारी विभागों को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराए बल्कि कर्मचारियों के हितों का भी पूरा ध्यान रखे। आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण को रोकना और उनके अधिकारों की रक्षा करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल — पारदर्शिता की नई राह
मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मियों के लिए एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल के विकास कार्य की समीक्षा की और इसे समयबद्ध ढंग से पूरा करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल के माध्यम से नियुक्ति, दस्तावेज सत्यापन, मानदेय भुगतान और कार्य निगरानी सहित सभी प्रक्रियाओं का केंद्रीकृत संचालन किया जाए जिससे व्यवस्था अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बन सके।
इस पोर्टल के लागू होने से पूरी व्यवस्था में समानता आएगी और किसी भी विभाग में मनमानी के बजाय एक मानक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित व्यवस्था को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए ताकि सभी सरकारी विभागों में एक समान आउटसोर्सिंग प्रणाली लागू की जा सके।
एजेंसियों के चयन में सख्त मानक
बैठक में आउटसोर्स एजेंसियों के एम्पैनलमेंट की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब एजेंसियों के चयन में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि एजेंसियों के चयन एवं संचालन से संबंधित सभी मानकों और प्रक्रियाओं को स्पष्ट, मानकीकृत और पारदर्शी बनाया जाए।
जो एजेंसियां निर्धारित मानकों पर खरी उतरेंगी केवल उन्हें ही काम सौंपा जाएगा। इन मानकों को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा रहा है ताकि सरकारी खजाने का सही उपयोग हो और आउटसोर्सिंग के नाम पर चल रही अनियमितताओं पर अंकुश लग सके।
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आउटसोर्सिंग की मॉडल व्यवस्था बनेगा UP
(यूपीकॉस)के जरिए सरकार की मंशा है कि प्रदेश के सरकारी कामकाज को तकनीक की बुनियाद पर खड़ा किया जाए। इस बदलाव से जहाँ एक तरफ प्रशासनिक कार्यकुशलता में सुधार आएगा वहीं आउटसोर्सिंग के माध्यम से रोजगार पा रहे हजारों युवाओं को एक सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य परिवेश मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ कहा कि यह सभी काम निर्धारित समय सीमा में पूरे किए जाएं ताकि उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग की मॉडल व्यवस्था के रूप में देशभर में एक मिसाल पेश कर सके।



