लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार 9 जून 2026 को राजधानी लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित सेवा अस्पताल परिसर में आयोजित 9 दिवसीय रामकथा महोत्सव के समापन समारोह में रामभक्तों को संबोधित किया। कथा का वाचन तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा किया गया। इस अवसर पर विधायक नीरज बोरा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने रामकथा का श्रवण भी किया और श्रद्धालुओं से कहा कि प्रभु के सान्निध्य में आने वाला हर व्यक्ति दैवीय आपदाओं से सुरक्षित रहता है।
समारोह में योगी आदित्यनाथ ने दो-टूक कहा कि जिनके मन में भारत के प्रति आस्था और निष्ठा नहीं है और जो भारतीय संस्कारों का सम्मान नहीं कर सकते, उनके लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम से द्रोह करने वालों को धरती पर जगह नहीं मिली — यह रामायण काल का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
लव जिहाद और लैंड जिहाद पर चेतावनी
मुख्यमंत्री ने लव जिहाद और लैंड जिहाद के खतरे के प्रति समाज को सतर्क करते हुए कहा कि इनके विरुद्ध समाज को एकजुटता के साथ खड़ा होना होगा। उन्होंने कहा कि रावण द्वारा माता जानकी का अपहरण और खर-दूषण द्वारा भूमि पर जबरन कब्जा — दोनों ही प्रवृत्तियां आज भी अलग-अलग रूपों में समाज में दिखती हैं। केरल उच्च न्यायालय ने 2009 और 2011 में धार्मिक जनसांख्यिकी बदलने की साजिशों पर चिंता व्यक्त की थी लेकिन तब उस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उत्तर प्रदेश ने 2020 में कड़ा कानून बनाया लेकिन इस विषय पर व्यापक जनजागरण की अभी भी आवश्यकता है।
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उन्होंने रामायण के पात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि ताड़का, मारीच और सुबाहु ने बस्तर के वनों और बस्तियों को उजाड़ा था। जब भी नकारात्मक शक्तियां वर्चस्व में आती हैं तो शिक्षण संस्थानों और शोध केंद्रों को भी उसी तरह बंजर बना देती हैं। मारीच ने पहले रावण को समझाने का प्रयास किया था लेकिन जब रावण ने मृत्यु की धमकी दी तो मारीच ने कहा कि यदि मृत्यु निश्चित है तो प्रभु राम के हाथों मरना बेहतर है।
राम जन्मभूमि आंदोलन और सर्वोच्च न्यायालय का फैसला
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन 491 वर्षों तक चला। संतों ने इसे जन्म-मरण का प्रश्न बनाया था लेकिन वे इसका श्रेय नहीं चाहते थे। उन्होंने इस अभियान से इसलिए जुड़े क्योंकि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम भारतीय परंपरा और विरासत में सभी के आदर्श हैं। 2019 में सर्वोच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने अपने फैसले में माना कि जहां रामलला विराजमान हैं वहीं रामजन्मभूमि है।
सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायमूर्ति ने स्वामी रामभद्राचार्य के बारे में कहा था कि उनका वक्तव्य सुनने के बाद स्पष्ट हो गया कि सनातन धर्मावलंबियों के साथ सैकड़ों वर्षों से अन्याय हो रहा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति और पूर्वाग्रह से ग्रसित चुनिंदा लोगों को छोड़ दें तो हर भारतवासी जिसके अंदर भारत का डीएनए है, उसने भगवान राम के आदर्शों को जीवन का हिस्सा बनाया है।
स्वामी रामभद्राचार्य का व्यक्तित्व और साधना
मुख्यमंत्री ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने चित्रकूट में भारत का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय स्थापित किया है और वे उसके कुलाधिपति हैं। इस उम्र में वे आराम कर सकते थे लेकिन राष्ट्रमंगल की कामना के साथ प्रभु की कथा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पवनपुत्र हनुमान और विभीषण प्रभु राम के सान्निध्य में आकर पूजनीय बने — यही राम नाम की शक्ति है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य अब 6 माह की एकांत साधना के लिए प्रस्थान कर रहे हैं और उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह साधना काल राष्ट्र के कल्याण के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु बनने से पहले रामभद्राचार्य ने दीर्घकाल तक अनवरत साधना की और अपने परिश्रम व संकल्पशक्ति से समाज का मार्गदर्शन किया।
कथा केवल सुनने की नहीं, अंगीकार करने की
मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से कहा कि व्यासपीठ द्वारा जो मर्म समझाया गया है उसे जीवन में आत्मसात करना होगा। कथा केवल सुनने की नहीं बल्कि जीवन में अंगीकार करने की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि जो भी प्रभु के सान्निध्य में आया वह दैवीय आपदाओं से मुक्त रहता है।
उन्होंने कहा कि माध्यकालीन काल में गोस्वामी तुलसीदास ने जन चेतना जागृत की, समाज को विदेशी आक्रांताओं के प्रति सचेत किया और उत्तर भारत को भगवान राम की भक्ति से एकसूत्र में पिरोया। वही अभियान आज तुलसीपीठाधीश्वर द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से कामना की कि हर भक्त का जीवन सुख और समृद्धि के साथ आगे बढ़ता रहे।



