ग्रेटर नोएडा वेस्ट। ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित श्री राधा स्काई गार्डन सोसायटी में शुक्रवार रात बिजली संकट के दौरान एक गंभीर घटना सामने आई। निवासियों के अनुसार बिजली की समस्या को लेकर मेंटेनेंस टीम से हुई बहस के बाद High Greens Facility Management ने बाहरी बाउंसर बुला लिए और दो निवासियों के साथ मारपीट की गई। मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं — पीड़ितों का आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया।
उत्तर प्रदेश में बिजली संकट — 33 उपकेंद्रों पर PAC तैनात
उत्तर प्रदेश में इन दिनों बिजली संकट गहराता जा रहा है। भीषण गर्मी में बिजली की माँग चरम पर है — हफ्तेभर में माँग 561 मेगावॉट तक बढ़ चुकी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के 33 उपकेंद्रों पर PAC तैनात की जा रही है। नोएडा के सेक्टर-122, 73 और 56 सहित कई सोसायटियों में 3 से 5 घंटे की कटौती आम हो गई है। लगातार फॉल्ट और वोल्टेज फ्लक्चुएशन के कारण सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त है। ऐसे माहौल में जहाँ सरकारी बिजली पहले से अनिश्चित है — वहाँ सोसायटियों की मेंटेनेंस कंपनियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। लेकिन श्री राधा स्काई गार्डन में स्थिति इसके उलट है।
भारी मेंटेनेंस — बुनियादी सुविधाएं फिर भी नदारद
निवासियों का आरोप है कि High Greens Facility Management समय पर भारी मेंटेनेंस शुल्क तो वसूलती है — लेकिन सोसायटी के अपने ट्रांसफार्मर का रखरखाव तक ठीक से नहीं होता। बार-बार ट्रांसफार्मर फुँकने से आए दिन पूरी सोसायटी अंधेरे में डूब जाती है। आसपास की अन्य सोसायटियों में बिजली रहती है — लेकिन यहाँ बार-बार कटौती होती है। इस समस्या को लेकर निवासी कई बार शिकायत कर चुके हैं — लेकिन कोई स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकला गया है।
समस्याओं की नींव पर खड़ा शहर — ग्रेटर नोएडा वेस्ट
ग्रेटर नोएडा वेस्ट — एक ऐसा शहर जो तेज़ी से बढ़ती ऊँची इमारतों और बड़े-बड़े वादों के साथ विकसित हुआ — लेकिन यहाँ की समस्याएं उतनी ही पुरानी हैं जितनी यहाँ की इमारतें। आए दिन किसी न किसी सोसायटी में बिजली संकट, बदइंतजामी और मेंटेनेंस की मनमानी की खबरें सामने आती रहती हैं। इतना ही नहीं — गार्ड, बाउंसर और मेंटेनेंस टीम द्वारा निवासियों के साथ मारपीट की घटनाएं भी अब असामान्य नहीं रहीं। भारी रकम चुकाकर घर खरीदने वाले निवासी जब बुनियादी सुविधाओं के लिए आवाज़ उठाते हैं — तो उन्हें जवाब की जगह बाउंसरों का सामना करना पड़ता है। श्री राधा स्काई गार्डन की यह घटना इस बड़ी समस्या का एक और चेहरा है।
शुक्रवार रात — साढ़े आठ बजे फिर गुल हुई बिजली
शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे सोसायटी की बिजली अचानक चली गई। भीषण गर्मी में घंटों बिजली न आने पर निवासी अपने अपने घरों से बाहर आए और High Greens Facility Management की मेंटेनेंस टीम से जवाब माँगा। इस पर मेंटेनेंस टीम काम छोड़कर जाने लगी। निवासियों ने उनसे अनुरोध किया कि वे अपना काम जारी रखें और उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी। बावजूद इसके बाद High Greens Facility Management ने बाहर से बाउंसर बुला लिए।
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पुलिस की मौजूदगी में बाउंसरों का आतंक
निवासियों के अनुसार मारपीट सोसायटी के बाहर हुई — उस स्थान पर जहाँ पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी मौजूद थी। बावजूद इसके पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप नहीं किया। दो निवासियों को बाउंसरों के हमले का शिकार होना पड़ा। एक पीड़ित की गर्दन पर हमले के निशान साफ दिख रहे हैं — जो इस घटना की गवाही देते हैं।
मारपीट के बाद जब बाउंसर मौके से भाग निकले तो निवासियों के अनुसार पुलिस ने उन्हें रोकने की बजाय पीड़ितों को ही हिरासत में लेने की कोशिश की। सोसायटी के अन्य निवासियों के हस्तक्षेप के बाद पीड़ितों को छोड़ा गया।
पीड़ितों का आरोप है कि High Greens Facility Management की ओर से पुलिस को बुलाया गया था। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने मेंटेनेंस कंपनी का पक्ष सुना — लेकिन पीड़ितों का पक्ष अनसुना कर दिया गया और शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया गया। जिसके बाद पीड़ितों ने 112 पर कॉल किया — लेकिन वहाँ से आए कर्मीयों ने भी पीड़ितों की पूरी बात सुने बिना चले गए। पुलिस का पक्ष जानने के लिए दैनिक आवाज़ ने संपर्क करने की कोशिश की — लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हुआ।
रात डेढ़ बजे मिली राहत — अभी भी जनरेटर के भरोसे
पूरे घटनाक्रम के करीब चार घंटे बाद रात एक बजे जनरेटर में डीजल डालकर बिजली बहाल की गई। निवासियों के अनुसार सोसायटी अभी भी जनरेटर के भरोसे चल रही है और स्थायी समाधान नहीं हुआ।
समस्याओं की लंबी फेहरिस्त
निवासियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी जिम बंद, स्विमिंग पूल बंद, लिफ्ट की बार-बार खराबी, हर जगह लीकेज और बेसमेंट पार्किंग की बदहाली को लेकर शिकायतें दी जाती रही हैं। रात को फोन करने पर मेंटेनेंस का नंबर व्यस्त मिलता है। भारी मेंटेनेंस शुल्क वसूलने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होता।
इस पूरे मामले में दैनिक आवाज़ ने High Greens Facility Management से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया — लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
