लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ में श्रम एवं सेवायोजन विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक की। इसमें विभाग की मौजूदा योजनाओं की प्रगति, आने वाली चुनौतियों और नए प्रस्तावों पर गहन चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश के श्रमिक महज उत्पादन तंत्र का एक पुर्जा नहीं — वे राज्य की आर्थिक रीढ़ और विकास की असली ताकत हैं। सरकार का संकल्प है कि मेहनतकश वर्ग, युवाओं और समाज के कमजोर तबकों को जीवन में सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के समान अवसर मिलें।
बाल श्रमिक विद्या योजना — 20 से 75 जिलों तक का सफर
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय बाल श्रमिक विद्या योजना के विस्तार को लेकर लिया गया। वर्ष 2020 में शुरू हुई यह योजना अब तक प्रदेश के केवल 20 जनपदों में चल रही थी। इसके तहत 8 से 18 वर्ष की आयु के उन बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाकर आर्थिक सहायता दी जाती है जो किसी न किसी रूप में काम करने को मजबूर हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस योजना को नए प्रावधानों के साथ अब पूरे प्रदेश के 75 जनपदों में लागू किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी बच्चे को घर की तंगहाली के कारण पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाल श्रम से प्रभावित इलाकों में विशेष अभियान चलाकर ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर असरदार बनाया जाए और निजी क्षेत्र को भी इन बच्चों के कौशल विकास में भागीदार बनाया जाए।
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सेवामित्र — रोजगार का डिजिटल मॉडल
मुख्यमंत्री ने सेवामित्र व्यवस्था की खुलकर सराहना की और इसे रोजगार व जनसुविधा का एक नवाचारी मॉडल बताया। वर्ष 2021 में शुरू हुई इस व्यवस्था के जरिये कोई भी नागरिक मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल या कॉल सेंटर के माध्यम से घर बैठे घरेलू सेवाएं मंगा सकता है। इससे एक तरफ नागरिकों को सुविधा मिल रही है तो दूसरी तरफ कुशल कामगारों को काम।
बैठक में बताया गया कि अभी पोर्टल पर 1,097 सेवा प्रदाता, 5,049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं। मुख्यमंत्री ने इसे और जनोपयोगी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी विभाग भी जरूरत के अनुसार सेवामित्र व्यवस्था का उपयोग करें — इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
श्रमिक सुविधा केंद्र — ‘लेबर अड्डा’ बनेगा सहारा
निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों की दशा सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी प्रमुख औद्योगिक शहरों में श्रमिक सुविधा केंद्र यानी ‘लेबर अड्डों’ को व्यवस्थित रूप से विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये केंद्र केवल मजदूरों के जमा होने की जगह न बनें — बल्कि इन्हें एक पूर्ण सहायता एवं सुविधा केंद्र के रूप में तैयार किया जाए। दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित आवास की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए।
32,583 कारखाने — श्रम विभाग की उपलब्धि
बैठक में श्रम विभाग की उपलब्धियों का भी ब्योरा प्रस्तुत किया गया। मार्च 2017 तक प्रदेश में पंजीकृत कारखानों की संख्या 14,176 थी — जो अब बढ़कर 32,583 हो गई है। यानी पिछले 9 वर्षों में 18,407 नए कारखाने पंजीकृत हुए। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अकेले 4,860 कारखानों का पंजीकरण किया गया। विभाग को BRAP सुधारों के क्रियान्वयन में ‘टॉप अचीवर’ का दर्जा मिला है और उद्योग समागम 2025 में श्रम क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए सम्मानित भी किया गया।
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कानपुर में बनेगा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान
मुख्यमंत्री ने कानपुर में प्रस्तावित औद्योगिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान और छात्रावास योजना को कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि उद्योगों की जरूरतों के हिसाब से प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना आज की सबसे बड़ी मांग है।
बैठक में उपस्थित रहे ये प्रमुख लोग
इस समीक्षा बैठक में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी तथा श्रम एवं सेवायोजन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
