नई दिल्ली। सुबह उठो, बाइक में पेट्रोल भरवाओ — और जेब में हाथ डालने से पहले एक बार सोचना पड़े। यही हाल है आज देश के करोड़ों आम नागरिकों का। 23 मई 2026 को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई — और यह महज 10 दिनों में तीसरी बार है जब ईंधन महंगा किया गया है। दिल्ली में पेट्रोल ₹99.51 और डीजल ₹92.49 प्रति लीटर पहुँच गया है। मुंबई में पेट्रोल ₹108 और कोलकाता में ₹110 को पार कर गया है। 15 मई से अब तक पेट्रोल और डीजल दोनों में करीब ₹5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है।
कहाँ से आई यह मुसीबत?
इस बार महंगाई की जड़ में है — पश्चिम एशिया का संकट। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर मंडरा रहा खतरा दुनिया भर के तेल बाजार को हिला रहा है। इस जलमार्ग से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है — इसलिए जब भी वैश्विक बाजार में उथल-पुथल होती है तो सबसे पहले मार भारत के आम नागरिक की जेब पर पड़ती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत फिलहाल $104.42 प्रति बैरल है — जो कुछ हफ्तों पहले की तुलना में काफी ऊपर है।
शहर-दर-शहर — क्या हैं आज के दाम?
| शहर | पेट्रोल | डीजल |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹99.51 | ₹92.49 |
| मुंबई | ₹108.45 | ₹95.02 |
| कोलकाता | ₹110.64 | ₹97.02 |
| लखनऊ | ₹99.31 | ₹92.70 |
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?
पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ना सिर्फ पंप पर महंगाई नहीं है — यह हर घर की थाली तक पहुँचती है।
जब डीजल महंगा होता है तो ट्रक, टेंपो और मालगाड़ियों का किराया बढ़ता है। किराया बढ़ने से सब्जी, दूध, अनाज — हर चीज महंगी हो जाती है। जो मजदूर रोज दिहाड़ी करता है — उसकी कमाई उतनी ही रहती है लेकिन खर्च बढ़ जाता है। जो बाइक से दफ्तर जाता है — वह महीने के अंत में हिसाब लगाकर परेशान होता है।
एक सामान्य परिवार जो महीने में 10 लीटर पेट्रोल खर्च करता है — उस पर इस महीने ₹50 का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। और जो ट्रांसपोर्टर रोज 200 लीटर डीजल जलाता है — उसका हर महीने ₹30,000 अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है।
10 दिनों में तीन बार — क्यों?
15 मई से शुरू हुई यह महंगाई का सिलसिला अब तीसरी बार तक पहुँच गया है। तेल कंपनियाँ — इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL — अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुसार रोज दाम तय करती हैं। जब कच्चा तेल महंगा होता है और रुपया कमजोर होता है — तो यह बोझ सीधे जनता पर आता है।
क्या राहत मिलेगी?
अभी कोई राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे। जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता — कच्चे तेल की कीमतें ऊँची रहेंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर स्थिति और बिगड़ी तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
सरकार पर दबाव है कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके जनता को राहत दे — लेकिन अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।
