गौतमबुद्ध नगर। सोमवार की सुबह जेवर के रनवे पर जब इंडिगो की फ्लाइट 6E-2278 उतरी तो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का एक नया अध्याय शुरू हो गया। सुबह 8:05 बजे लखनऊ से पहुंची यह फ्लाइट एयरपोर्ट पर उतरने वाली पहली कमर्शियल फ्लाइट बनी। इसके 25 मिनट बाद 8:30 बजे जेवर से पहली उड़ान भरी गई जिसमें एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले 170 किसान और कामगार सवार थे। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने इस ऐतिहासिक कमर्शियल सेवा का उद्घाटन किया।
लखनऊ से जेवर आई पहली फ्लाइट में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, मुख्य सचिव एसपी गोयल, प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दुबे और जिले के 75 कारोबारी सवार थे। एयरपोर्ट पर इनका भव्य स्वागत हुआ। लखनऊ से आई यह फ्लाइट यात्रियों को उतारने के बाद बेंगलुरु के लिए रवाना हुई।
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₹11,200 करोड़ का ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में से एक है। इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर लगभग ₹11,200 करोड़ के निवेश से तैयार किया गया है। एयरपोर्ट का शिलान्यास 25 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था और 28 मार्च 2026 को उद्घाटन हुआ था। निर्माण का टेंडर स्विस कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल को मिला था।
पहले चरण में 1334 हेक्टेयर में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। सभी चार चरणों के पूरा होने के बाद यह एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का छठा सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन जाएगा। शुरुआत में देश के 45 शहरों के लिए करीब 65 कमर्शियल फ्लाइटें संचालित होंगी।
उड्डयन मंत्री नायडू ने कहा — “अगर यह 10 साल पहले की बात होती तो जेवर गांव में इस शानदार एयरपोर्ट को देखने का काम नामुमकिन होता।” उन्होंने उन किसानों को बधाई दी जिन्होंने इस परियोजना के लिए अपनी जमीन दी।
Cargo-MRO हब
यह एयरपोर्ट भारत के पहले Cargo और MRO (Maintenance, Repair and Overhaul) केंद्र के रूप में भी विकसित होने जा रहा है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पूरे प्रदेश के किसान अपनी अन्न, फल और सब्जियां उगाकर कार्गो सुविधा के माध्यम से सीधे वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में सक्षम होंगे। जेवर इस सुविधा का केंद्र बिंदु बनेगा।
YEIDA ने TATA के सहयोग से जेवर में लगभग ₹225 करोड़ की लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की है। यह केंद्र आधुनिक तकनीक में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नए अवसर देगा। उद्योगों की जरूरत के अनुसार दक्ष मानव संसाधन तैयार होंगे और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
IGI से घटेगा बोझ
एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर के करीब 23 प्रतिशत हवाई यात्री आने वाले समय में जेवर एयरपोर्ट को प्राथमिकता दे सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो लंबे समय से क्षमता से अधिक भार झेल रहे आईजीआई एयरपोर्ट को बड़ी राहत मिलेगी।
सर्वे में 8 प्रतिशत यात्री तत्काल नोएडा एयरपोर्ट पर शिफ्ट होने को तैयार हैं। वहीं 15 प्रतिशत अभी इंतजार करो और देखो की स्थिति में हैं। ये यात्री सड़क और मेट्रो कनेक्टिविटी, उड़ान विकल्प, पार्किंग और चेक-इन प्रक्रिया का अनुभव लेने के बाद अंतिम निर्णय लेंगे।
यात्रियों ने नोएडा एयरपोर्ट को चुनने के तीन प्रमुख कारण बताए — आईजीआई की तुलना में कम भीड़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दक्षिण दिल्ली के यात्रियों के लिए बेहतर पहुंच और आधुनिक बुनियादी ढांचे की उम्मीद। एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सड़क, मेट्रो और परिवहन व्यवस्था मजबूत रही तो अगले दो से तीन वर्षों में यह दिल्ली-एनसीआर का दूसरा प्रमुख विमानन केंद्र बन सकता है।
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किफायती किराए में AC सफर
एयरपोर्ट के शुभारंभ के साथ ही YEIDA ने सोमवार से सिटी ई-बस सेवा भी शुरू की। पहले दिन यात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही क्योंकि कई लोगों को लगा कि AC बस का किराया अधिक होगा। हालांकि किराया बिल्कुल सामान्य है।
यात्री ने बताया कि कम किराए में AC सुविधा मिलना बड़ी राहत है। नितिन ने कहा कि बस का सफर आरामदायक और सुचारू रहा — बस पूरी तरह साफ-सुथरी थी। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने कहा — “जेवर के किसान उसी जमीन पर बने एयरपोर्ट से उड़ान भर रहे हैं जहां वे कभी खेती करते थे। यह एक ऐतिहासिक पल है।”


