नई दिल्ली/रोम। कभी-कभी दो देशों के रिश्ते महज कागज़ी दस्तावेज़ों से आगे बढ़कर एक नई ऊँचाई पर पहुँच जाते हैं। 20 मई 2026 को रोम में कुछ ऐसा ही हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पाँच देशों की यात्रा के आखिरी पड़ाव पर इटली पहुँचे — और जो हुआ, उसने भारत की विदेश नीति में एक और मज़बूत अध्याय जोड़ दिया।
रोम में हुआ क्या?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19-20 मई को इटली के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने दो अहम मुलाकातें कीं — पहली, इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला से क्विरिनाले पैलेस में, और दूसरी, इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ औपचारिक वार्ता।
दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई जिसमें एक बड़ा फ़ैसला सामने आया — भारत और इटली के मौजूदा रणनीतिक संबंधों को अब विशेष रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया जाएगा। यह महज शब्दों का हेरफेर नहीं है — यह दोनों देशों के रिश्तों में एक नई ज़िम्मेदारी और प्रतिबद्धता का संकेत है।
साझेदारी में क्या-क्या शामिल?
यह साझेदारी सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। दोनों देशों ने जिन क्षेत्रों में मिलकर काम करने की बात कही, वे भविष्य की दिशा तय करने वाले हैं —
व्यापार और निवेश — दोनों देशों ने 2029 तक आपसी व्यापार को 20 अरब यूरो तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। रक्षा, एयरोस्पेस, दवा उद्योग, मशीनरी, ऑटोमोबाइल पुर्जे और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के उद्योगपतियों के बीच नई साझेदारियाँ बनने की उम्मीद है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस — दोनों नेताओं ने AI को लेकर एक खास दृष्टिकोण साझा किया। भारत का MANAV विज़न — जो तकनीक के केंद्र में इंसान को रखता है — और इटली की मानवतावादी परंपरा से उपजी “एल्गो-एथिक्स” की सोच, दोनों मिलकर एक ऐसे AI भविष्य की नींव रखना चाहते हैं जो समाज को सशक्त बनाए, न कि उसे अपनी मुट्ठी में करे।
रक्षा सहयोग — इस क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ी है। मंत्री स्तर पर बैठकें, रक्षा अभ्यास और बंदरगाह दौरों के ज़रिए यह रिश्ता और गहरा होगा।
अंतरिक्ष और ऊर्जा — अंतरिक्ष अनुसंधान और ऊर्जा परिवर्तन में भी दोनों देश कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं।
IMEC और भारत-EU व्यापार समझौता
वार्ता में IMEC — यानी भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे — का भी ज़िक्र हुआ। यह गलियारा भारत को खाड़ी देशों, इज़राइल, मिस्र और भूमध्य सागर के रास्ते इटली के त्रिएस्ते बंदरगाह से जोड़ेगा। अगर यह योजना पूरी हुई तो यह व्यापार का एक क्रांतिकारी रास्ता बन सकता है।
इसके अलावा भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने पर भी दोनों देशों ने ज़ोर दिया।
‘मेलोडी’ मोमेंट — जब रोम की शाम हुई खास
राजनीति और कूटनीति के बीच एक पल ऐसा भी आया जो सोशल मीडिया पर छा गया। रात के खाने के बाद PM मोदी और PM मेलोनी ने रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम का एक साथ दौरा किया। दो देशों के नेताओं की इस गर्मजोशी को दुनिया ने “मेलोडी मोमेंट” का नाम दे दिया। लेकिन इस तस्वीर के पीछे जो असली काम हुआ — वह तस्वीर से कहीं ज़्यादा वज़नदार है।
भारत के लिए यह क्यों ज़रूरी है?
इटली यूरोप की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, G7 का सदस्य है और यूरोपीय संघ में भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार भी। ऐसे देश के साथ विशेष रणनीतिक साझेदारी का मतलब साफ है — रोम में हुई यह बैठक सिर्फ दो राजधानियों तक नहीं, पूरे यूरोप तक असर डालेगी।
पाँच देशों का सफर पूरा कर PM मोदी आज दिल्ली लौट आए — रोम में जो बीज बोए गए हैं, उनके फल आने वाले वर्षों में दिखेंगे। वापसी के बाद PM मोदी आज शाम 5 बजे सेवा तीर्थ में मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे — जो सरकार के कामकाज की एक अहम मध्यावधि समीक्षा होगी।
