लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के करीब 16 लाख अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों के महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब उनका महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगा। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। लंबे समय से इस फैसले का इंतज़ार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह खबर किसी उत्सव से कम नहीं है।
केंद्र के नक्शेकदम पर चली योगी सरकार
इससे पहले केंद्र सरकार ने 22 अप्रैल 2026 को सातवें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का आदेश जारी किया था। उत्तर प्रदेश सरकार की परंपरा रही है कि जब भी केंद्र DA बढ़ाता है, राज्य सरकार भी अपने कर्मचारियों को उसी अनुपात में राहत देती है। इस बार भी वही हुआ — वित्त विभाग ने फाइल तैयार की और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्वीकृति के बाद आधिकारिक आदेश जारी हो गया।
गौरतलब है कि महंगाई भत्ते की समीक्षा साल में दो बार होती है — जनवरी और जुलाई में। हर बार AICPI-IW यानी औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आँकड़ों के आधार पर यह तय किया जाता है कि कितनी बढ़ोतरी होगी। इस बार जनवरी 2026 की समीक्षा में 2 प्रतिशत की वृद्धि तय हुई।
कब और कैसे मिलेगा फायदा?
यह बढ़ोतरी भले ही 1 जनवरी 2026 से लागू मानी जाएगी, लेकिन इसका नकद फायदा कर्मचारियों को मई 2026 के वेतन से मिलना शुरू होगा। यानी जून की शुरुआत में जो सैलरी आएगी, उसमें 60 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता जुड़ा होगा — और कर्मचारी सीधे अपनी बढ़ी हुई तनख्वाह देख सकेंगे।
जनवरी से अप्रैल 2026 तक के चार महीनों का जो बकाया बनता है, वह सीधे हाथ में नहीं आएगा। पुरानी व्यवस्था के अनुसार यह एरियर कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि (GPF) खाते में जमा किया जाएगा। यह व्यवस्था कर्मचारियों की दीर्घकालिक बचत को मज़बूत करती है — भले ही तुरंत नकद न मिले।
किसे मिलेगा फायदा?
इस फैसले का सीधा लाभ उत्तर प्रदेश के लगभग 16 लाख सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों को मिलेगा। इसमें सिर्फ नौकरीपेशा लोग ही नहीं — पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशन पाने वाले भी शामिल हैं, जिन्हें महंगाई राहत (DR) के रूप में यही बढ़ोतरी मिलेगी। यानी रिटायर हो चुके कर्मचारियों और उनके परिजनों को भी इस फैसले का फायदा पहुँचेगा।
सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक, राज्य के विभिन्न विभागों में काम करने वाले बाबू से लेकर अफसर तक — सभी इस बढ़ोतरी के दायरे में आएंगे। महंगाई के इस दौर में जब रोज़मर्रा की ज़रूरतों की कीमतें आसमान छू रही हैं, यह 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर्मचारियों की जेब में थोड़ी राहत ज़रूर लेकर आएगी।
सैलरी पर कितना असर पड़ेगा?
सीधे शब्दों में समझें — जिस कर्मचारी की बेसिक सैलरी 30,000 रुपये है, उसे पहले 58% के हिसाब से 17,400 रुपये DA मिलता था। अब 60% के हिसाब से 18,000 रुपये मिलेगा — यानी हर महीने 600 रुपये की बढ़ोतरी। जिनकी बेसिक सैलरी ज़्यादा है, उन्हें उसी अनुपात में ज़्यादा फायदा होगा। वरिष्ठ अधिकारियों के लिए यह बढ़ोतरी हर महीने 1,500 से 2,000 रुपये तक भी हो सकती है।
आगे क्या?
अनुमान है कि जुलाई 2026 में DA में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। AICPI-IW के ताज़ा आँकड़ों के आधार पर कर्मचारी संगठनों का मानना है कि अगली बार 3 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है — जिससे DA 63 प्रतिशत तक पहुँच सकता है। हालाँकि इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
इसके अलावा 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएँ जारी हैं। अगर यह लागू होता है तो बेसिक सैलरी का ढाँचा ही बदल जाएगा — और उसके बाद DA की गणना भी नए सिरे से होगी। कर्मचारी संगठन लंबे समय से 8वें वेतन आयोग की माँग करते आ रहे हैं।
