नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत के एक बयान ने सोशल मीडिया पर ऐसी आग लगाई जो अभी तक बुझी नहीं है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत का 15 मई का एक वाक्य — और उसके जवाब में खड़ी हुई एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक पार्टी — आज देश की सबसे बड़ी चर्चा बन चुकी है। Cockroach Janta Party के Instagram पर अब 1.52 करोड़ से ज़्यादा followers हैं — और पार्टी के सिर्फ 56 posts हैं जबकि BJP के 18,000 से अधिक।
CJI ने क्या कहा था — और किस संदर्भ में?
15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जॉयमाल्या बागची के साथ CJI सूर्य कांत की पीठ दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नामांकन प्रक्रिया से जुड़ी याचिका की सुनवाई कर रही थी। यह उसी याचिकाकर्ता की तीसरी याचिका थी — पीठ ने इसे “निरर्थक” करार दिया।
इसी सुनवाई के दौरान CJI ने कहा — “समाज में पहले से ही परजीवी हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं… ऐसे युवा हैं जो कॉकरोच की तरह हैं, जिन्हें न नौकरी मिलती है, न पेशे में जगह। कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया, कुछ RTI एक्टिविस्ट — और सब पर हमला करते रहते हैं।”
अगले दिन 16 मई को CJI ने सफाई दी। उन्होंने कहा — “मैंने जो आलोचना की वह उन लोगों के लिए थी जो फर्जी डिग्रियों के ज़रिए कानून जैसे पेशों में घुस आए हैं। यह सुझाव देना बिल्कुल गलत है कि मैंने देश के युवाओं की आलोचना की।” उन्होंने यह भी जोड़ा — “देश का हर युवा मुझे विकसित भारत का स्तंभ लगता है।”
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Cockroach Janta Party कैसे बनी?
CJI की सफाई से पहले ही बात फैल चुकी थी। शिकागो में रहने वाले 30 वर्षीय अभिजीत दीपके — जो पहले AAP के सोशल मीडिया रणनीतिकार रह चुके हैं — ने 16 मई को X पर एक Google Form शेयर किया। Form का शीर्षक था — “सभी ‘कॉकरोचों’ के लिए एक मंच।” उन्होंने AI tools की मदद से 24 घंटे के भीतर पार्टी का logo, website और anthem तैयार कर लिया।
कुछ ही घंटों में 15,000 registrations। 19 मई तक 80,000। अब तक 3.5 लाख से अधिक लोग membership ले चुके हैं। #MainBhiCockroach देश का सबसे बड़ा viral slogan बन गया।
पार्टी की 5 मांगें
CJP ने एक औपचारिक घोषणापत्र जारी किया है जिसमें 5 मांगें हैं —
1. सेवानिवृत्त होने वाले किसी भी मुख्य न्यायाधीश को राज्यसभा की सीट नहीं दी जाएगी — ताकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनी रहे।
2. अगर किसी भी राज्य में कोई वैध वोट मतदाता सूची से हटाया गया तो मुख्य चुनाव आयुक्त को UAPA के तहत गिरफ्तार किया जाएगा।
3. संसद में महिलाओं को 33% नहीं बल्कि 55% आरक्षण मिलेगा — और कैबिनेट के 50% पद भी महिलाओं के लिए होंगे।
4. अंबानी और अडानी के स्वामित्व वाले मीडिया हाउस के लाइसेंस रद्द होंगे — और “गोदी मीडिया” एंकरों के बैंक खाते जांचे जाएंगे।
5. दल-बदल करने वाले किसी भी MLA या MP को 20 साल तक चुनाव लड़ने और किसी भी सार्वजनिक पद पर बने रहने से प्रतिबंधित किया जाएगा।
NEET पेपर लीक से भी जोड़ा आंदोलन को
CJP का यह आंदोलन सिर्फ CJI के बयान तक सीमित नहीं रहा। पार्टी ने NEET UG 2026 पेपर लीक मामले को भी अपनी मुहिम से जोड़ा। पार्टी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की, पेपर लीक से जुड़े छात्र आत्महत्या के मामलों पर चिंता जताई और CBSE की re-checking fee खत्म करने की माँग उठाई। पार्टी के मुताबिक NEET लीक और CJI का बयान — दोनों उसी बड़ी व्यवस्थागत विफलता के हिस्से हैं जिसकी मार युवाओं पर सबसे ज़्यादा पड़ रही है।
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राजनीतिक हलचल
यह आंदोलन सिर्फ ऑनलाइन मज़ाक तक नहीं रहा। माहुआ मोइत्रा और कीर्ति आज़ाद जैसे सांसद भी इससे जुड़ गए। अब खबर है कि पार्टी बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में अपना पहला उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है — BJP और प्रशांत किशोर की Jan Suraaj Party के खिलाफ।
दोनों पक्ष
एक पक्ष का मानना है कि CJI के शब्द संदर्भ से बाहर निकाले गए। सुनवाई फर्जी डिग्रीधारी वकीलों से जुड़ी थी — और टिप्पणी उसी पर थी। सफाई भी अगले दिन दे दी गई।
दूसरे पक्ष का कहना है कि देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर बैठे व्यक्ति की भाषा इतनी सतर्क होनी चाहिए कि कोई भी नागरिक — चाहे संदर्भ कोई भी हो — खुद को अपमानित महसूस न करे।
