नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के चार दिवसीय भारत दौरे के दूसरे दिन रविवार को नई दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ उनकी विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता सम्पन्न हुई। यह बैठक कई मायनों में ऐतिहासिक रही — दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा सहयोग, परमाणु ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरिम व्यापार समझौते जैसे अहम विषयों पर ठोस प्रगति दर्ज की। रूबियो ने साफ कहा — “भारत-अमेरिका के रिश्तों को बहाल करने की जरूरत नहीं — यह साझेदारी पहले से मजबूत है, अब इसे नई ऊँचाइयों तक ले जाना है।”
जयशंकर ने स्पष्ट किया भारत का रुख
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बैठक में अमेरिका, ईरान और पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत संवाद, कूटनीति और क्षेत्रीय शांति का समर्थक है। जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान, निर्बाध समुद्री व्यापार और सुरक्षित सप्लाई चेन को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है। निर्बाध समुद्री व्यापार का मुद्दा उठाकर भारत ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल और गैस के जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही पर अपना रुख संकेतों में स्पष्ट कर दिया।
जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत के अमेरिका, इजरायल, ईरान और खाड़ी देशों के साथ अच्छे संबंध हैं और मौजूदा चुनौती इन सभी रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की है। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा कीमतों में स्थिरता और कमी का पक्षधर है क्योंकि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारतीय हितों से सीधे जुड़ा विषय है।
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ऊर्जा, परमाणु और AI — तीन बड़े क्षेत्रों में सहयोग
बैठक में भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग, परमाणु ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे तीन बड़े भविष्योन्मुखी क्षेत्रों पर गहन चर्चा हुई। भारत ने ऊर्जा व्यापार के विस्तार का स्वागत किया। जयशंकर ने कहा कि सरकार देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इसके साथ ही दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में खनिज अन्वेषण, खनन और प्रसंस्करण में द्विपक्षीय सहयोग को औपचारिक रूप देने पर सहमति जताई — यह चीन की खनिज क्षेत्र में वैश्विक बढ़त को संतुलित करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।
अंतरिम ट्रेड डील — जल्द होगा अंतिम रूप
जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों के बीच जल्द अंतरिम ट्रेड डील को अंतिम रूप देने पर भी चर्चा हुई। बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप और PM मोदी के बीच हुए व्यापार समझौते का दोनों नेताओं ने स्वागत किया। गौरतलब है कि पिछले साल रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था — यह समझौता उस तनाव को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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वीजा, पीपुल-टू-पीपुल और आतंकवाद
बैठक में पीपुल-टू-पीपुल संबंधों, वीजा मुद्दों और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति दोहराते हुए दोनों देशों की एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की सराहना की।
रूबियो का संदेश — रिश्ता मजबूत है, अब नई ऊँचाइयों की बारी
बैठक में रूबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों को वैश्विक स्तर पर सबसे अहम रणनीतिक साझेदारियों में गिनाया। उन्होंने कहा कि दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और यही साझा लोकतांत्रिक मूल्य इस मजबूत रिश्ते की असली ताकत है। रूबियो ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं — बल्कि यह एक वैश्विक साझेदारी है। उनके अनुसार इस रिश्ते को नए सिरे से शुरू करने की कोई जरूरत नहीं — जरूरत है तो इसे और आगे ले जाने की।
Quad — 26 मई को बड़ी बैठक
बैठक के समापन पर दोनों नेताओं ने Quad के जरिये द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। 26 मई को Quad Foreign Ministers Meeting नई दिल्ली में होगी जिसकी अध्यक्षता जयशंकर करेंगे — इसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्री शामिल होंगे।
