नई दिल्ली/दुबई। पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध की आग भड़क उठी है। अमेरिका ने सोमवार की रात 25 मई 2026 को ईरान के दक्षिणी इलाके बंदर अब्बास के पास IRGC के मिसाइल लॉन्च साइट्स और बारूदी सुरंगें बिछाने वाली नौकाओं पर सेल्फ डिफेंस स्ट्राइक किए। इस हमले के बाद ईरान ने अमेरिका पर सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगाया है। वहीं इस पूरे संकट का सबसे ज्यादा असर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर पड़ रहा है — जहां 35 लाख से अधिक भारतीय रहते और काम करते हैं।
क्या हुआ 25 मई की रात
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि यह हमले “आत्मरक्षा में” किए गए क्योंकि ईरानी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य में माइन्स बिछाने की कोशिश कर रही थी। इसके अलावा एक ईरानी मिसाइल साइट ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने की कोशिश की — जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने उसे भी तबाह किया। इस दौरान CENTCOM ने यह भी साफ किया कि शांति वार्ता के बीच भी अपने सैनिकों की जान की रक्षा करना उसकी पहली प्राथमिकता है — और जब भी जरूरत पड़ेगी, जवाबी कदम उठाया जाएगा।
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वहीं दूसरी तरफ IRGC ने दावा किया कि उसने अमेरिकी ड्रोन और लड़ाकू विमान को खदेड़ा — हालांकि CENTCOM के अनुसार वास्तव में अमेरिका ने एक Iranian Shahed-139 ड्रोन को USS Abraham Lincoln के पास F-35C से मार गिराया। इसके साथ ही ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने “पिछले 48 घंटों में सीजफायर का स्पष्ट उल्लंघन” किया है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा कि “होर्मुज खुला रहेगा — किसी भी कीमत पर।”
दुबई में पहले भी बज चुके हैं अलार्म — 3 भारतीय घायल
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब UAE पर खतरा मंडराया हो। 4-5 मई 2026 को ईरान ने UAE पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे — जिसमें फुजैरा के तेल रिफाइनरी परिसर में भीषण आग लग गई थी। इस हमले में 3 भारतीय नागरिक घायल हुए थे। दुबई, अबू धाबी और शारजाह में मिसाइल अलर्ट बजाए गए थे और लोगों को शेल्टर लेने के निर्देश दिए गए थे। UAE की वायु रक्षा प्रणाली ने 12 बैलेस्टिक मिसाइल, 3 क्रूज मिसाइल और 4 ड्रोन को मार गिराया था। हालांकि कुछ मिसाइलें रक्षा प्रणाली को भेदकर तेल ढांचे तक पहुंच गई थीं।
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35 लाख भारतीयों पर क्या असर
UAE में रहने वाले 35 लाख से अधिक भारतीय इस संकट से सीधे प्रभावित हैं। इनमें से अधिकांश दुबई, अबू धाबी और शारजाह में काम करते हैं। जब-जब मिसाइल अलर्ट बजता है तब-तब भारतीय परिवारों में दहशत फैल जाती है। इसके अलावा UAE की अर्थव्यवस्था पर भी इस संकट का असर पड़ रहा है — जिससे भारतीयों की नौकरियां और रेमिटेंस (भारत भेजा जाने वाला पैसा) भी प्रभावित हो सकता है। भारत सरकार ने UAE में रहने वाले अपने नागरिकों से सतर्क रहने और दूतावास के संपर्क में रहने की अपील की है।
भारत पर आर्थिक असर — पेट्रोल से CNG तक
इस पूरे संकट का भारत पर सबसे बड़ा असर ईंधन की कीमतों के रूप में दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत का लगभग 20% तेल आयात होता है। इसलिए जब-जब होर्मुज पर तनाव बढ़ता है तब-तब कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूती हैं। नतीजतन पिछले 11 दिनों में पेट्रोल ₹7.50, डीजल ₹7.53 और CNG ₹6 प्रति किलो महंगी हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक यह संकट नहीं सुलझता तब तक ईंधन की कीमतों में राहत मिलना मुश्किल है।
