गाज़ीपुर। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने सोमवार 8 जून 2026 को अपने कार्यालय में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए बताया कि जनपद की समस्त तहसीलों में अचल संपत्तियों की सर्किल दरों में 10 से 15 प्रतिशत का इजाफा किया गया है। यह संशोधन 8 जून 2026 से लागू हो गया है। गौरतलब है कि अनेक क्षेत्रों में वर्ष 2015 के पश्चात दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ था। दशक भर की इस स्थिरता को देखते हुए दरों को बाजार के वर्तमान मूल्यों के निकट लाने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से जनपद में संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।
किन क्षेत्रों में हुई वृद्धि
जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने बताया कि उप निबंधक कार्यालय सदर, मोहम्मदाबाद, जमानियां, सैदपुर, जखनियां, कासिमाबाद और सेवराई में नगरीय, अर्धनगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में मूल मूल्य, अन्य कृषि एवं अकृषक भूमि की दरों में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। वाणिज्यिक भूमि की दरों में सैदपुर और सेवराई में 10 से 12 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। जखनियां में वाणिज्यिक भूमि की दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। निर्माण और वृक्ष की भूमि में भी किसी प्रकार की वृद्धि नहीं की गई है। जिलाधिकारी ने बताया कि यह निर्णय संपत्ति के वास्तविक बाजारू मूल्य और सरकारी सर्किल दरों के बीच के अंतर को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।
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तहसीलवार विवरण
जिलाधिकारी ने तहसीलवार जानकारी देते हुए बताया कि तहसील सदर में रामपुर उर्फ झिंगुरपट्टी (शहरी व देहाती), जमलापुर देहाती, सुखदेवपुर और रौजा शाहबरखुर्दार की दरों में वर्ष 2015 से कोई वृद्धि नहीं हुई थी। इसलिए इन क्षेत्रों की दरों को आसपास की दरों के समतुल्य किया गया है। तहसील मुहम्मदाबाद में राजस्व ग्राम चकबाला, चकभिखू और मच्छटी की दरों को भी निकटवर्ती क्षेत्रों की दरों के बराबर लाया गया है। तहसील जमानियां में कालूपुर की दरों में वर्ष 2015 से कोई वृद्धि नहीं हुई थी — इन्हें भी अब आसपास के क्षेत्रों की दरों के अनुरूप संशोधित किया गया है। इन सभी क्षेत्रों में लंबे समय से दरें स्थिर रहने के कारण बाजारू मूल्यों से काफी अंतर आ गया था।
कृषि भूमि में कोई बदलाव नहीं
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनपद की समस्त तहसीलों में 0.070 हेक्टेयर वाली कृषि भूमि की दरों में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं की गई है। यह दरें पहले से ही बाजारू दरों के समतुल्य थीं इसलिए इनमें कोई संशोधन आवश्यक नहीं समझा गया। उल्लेखनीय है कि जहां एक ओर आवासीय, वाणिज्यिक और अकृषक भूमि की दरों में बाजारू मूल्यों के अनुरूप बदलाव किए गए हैं, वहीं कृषि भूमि की दरों को पूर्ववत रखा गया है।
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मुद्रास्फीति के आधार पर लिया फैसला
जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने बताया कि उपरोक्त सभी क्षेत्रों में वर्ष 2024 के बाद मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए दरों को बाजारू मूल्यों के अनुरूप समतुल्य किया गया है। यह कदम इसलिए जरूरी था क्योंकि कई क्षेत्रों में संपत्ति की सर्किल दरें वास्तविक बाजारू दरों से काफी कम थीं। नई दरें लागू होने से संपत्ति पंजीकरण में पारदर्शिता आएगी। यह निर्णय बाजार की मौजूदा स्थिति का गहन अध्ययन करने के बाद लिया गया है। अब संपत्ति के क्रेता और विक्रेता दोनों को सरकारी और बाजारू दरों के बीच के बड़े फासले से नहीं जूझना पड़ेगा।


