दुल्लहपुर (गाज़ीपुर)। जंतर मंतर पर 19 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर गाज़ीपुर में भी चिंता गहरा गई। धामूपुर के शहीद अब्दुल हमीद पार्क में गुरुवार को पूर्व जिला पंचायत सदस्य रमेश यादव के नेतृत्व में समाजसेवियों ने राष्ट्रपति के नाम खून से पत्र लिखकर केंद्र सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की।
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खून से लिखी राष्ट्रपति को चिट्ठी
शहीद अब्दुल हमीद पार्क, धामूपुर में एकत्र समाजसेवियों ने राष्ट्रपति को संबोधित पत्र में कहा कि सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर मंतर पर आमरण अनशन पर हैं और उनकास्वास्थ्य लगातार गिर रहा है। लगातार अनशन के कारण उनका वजन लगभग साढ़े आठ किलो कम हो चुका है जिससे उनके शुभचिंतकों में चिंता बढ़ गई है।
राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर सरकार को वांगचुक की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और अनशन समाप्त कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य रमेश यादव ने कहा कि वांगचुक जैसे समर्पित समाजसेवी का अनशन इतने लंबे समय तक जारी रहना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में वांगचुक का योगदान अतुलनीय है और सरकार को उनकी मांगों पर बिना देरी के गंभीरता से विचार करना चाहिए।
वांगचुक का दिल्ली अनशन — पृष्ठभूमि
लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, पर्यावरणविद और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं। 19 दिनों के लगातार अनशन से उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा है।
उनकी मुख्य मांगें हैं — NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में कार्रवाई, शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। दिल्ली हाई कोर्ट ने वांगचुक की प्रतिदिन क्लीनिकल मॉनिटरिंग का आदेश दिया है।
इस आंदोलन को देशभर से समर्थन मिल रहा है। सपा सांसद डिंपल यादव, AAP के अरविंद केजरीवाल और बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा सहित अनेक हस्तियां जंतर मंतर पहुंचकर वांगचुक का समर्थन कर चुकी हैं।
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सरकार से हस्तक्षेप की मांग
दिव्यांग शक्ति संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आर.पी. पांडेय ने कहा — “सोनम वांगचुक पर्यावरण, शिक्षा और लोकतंत्र के प्रहरी हैं। युवाओं के हितों के लिए उनका संघर्ष सरकार की संवेदनशीलता की परीक्षा ले रहा है।”
कार्यक्रम में प्रधान रामपूजन राजभर, योगेश पांडेय, वृषभदेव राय, श्रीनारायण गिरी और मनीष यादव सहित अनेक समाजसेवी उपस्थित रहे। उन्होंने एकजुट होकर मांग की कि केंद्र सरकार मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए वांगचुक से शीघ्र वार्ता करे और युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुने।



