गाज़ीपुर। करीब 36 वर्ष पुराने बहुचर्चित देवकली पंप कैनाल लूट कांड में गाज़ीपुर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। यह मामला वर्ष 1990 के आसपास दर्ज हुआ था और लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।
बचाव पक्ष की दलीलों और उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करने के बाद CJM ने बृजेश सिंह को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त घोषित कर दिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कचहरी परिसर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही और अतिरिक्त पुलिस बल भी मुस्तैद रहा। पूरी न्यायिक प्रक्रिया शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई।
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36 साल बाद आया फैसला
देवकली पंप कैनाल लूट कांड का पंजीकरण 1990 के दशक में हुआ था। उस दौर में यह मामला गाज़ीपुर में काफी चर्चा में रहा। पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह के खिलाफ इस प्रकरण में आरोप दाखिल किए गए थे और तब से यह मामला न्यायालय में लंबित था। तीन दशक से अधिक समय बाद 15 जुलाई को CJM अदालत ने अंतिम निर्णय सुनाया। फैसले की खबर फैलते ही न्यायालय परिसर और राजनीतिक गलियारों में दिनभर चर्चा बनी रही।
साक्ष्यों के अभाव में बरी
CJM अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाने के कारण मामला कमजोर पड़ गया।
बचाव पक्ष की दलीलों और उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बृजेश सिंह को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त घोषित कर दिया।
फैसले की सूचना मिलते ही न्यायालय परिसर में हलचल बढ़ गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रहे।
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कड़ी सुरक्षा में शांतिपूर्ण निर्णय
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कचहरी परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। न्यायालय परिसर के प्रमुख प्रवेश द्वारों और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती रही।
किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय पुलिस के साथ अतिरिक्त पुलिस बल भी मुस्तैद रहा। अदालत परिसर में आने-जाने वालों पर निगरानी रखी गई।
हालांकि अदालत परिसर में कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली और 36 साल पुराने इस मामले का पटाक्षेप शांतिपूर्ण माहौल में हुआ।



