पटना/भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले में 17 जून 2026 को हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि भरत तिवारी को कुल पांच गोलियां लगी थीं — जबकि शुरुआत में तीन गोलियों की बात कही जा रही थी। मृतक की बहन पहले से पांच गोलियों का दावा करती रही थीं, जो अब रिपोर्ट से सही साबित हुआ है। मामले में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक आयोग के गठन का ऐलान किया है और स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।
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चार आर-पार, एक शरीर में मिली
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पहली गोली बाईं जांघ के ऊपरी हिस्से में सामने की तरफ से लगी। दूसरी गोली उसी जांघ के मध्य भाग में भीतर की ओर से लगी पाई गई। तीसरी और चौथी गोली दाईं जांघ में लगी थीं — तीसरी मध्य भाग के भीतरी हिस्से में और चौथी बाहरी हिस्से से अंदर की ओर। पांचवीं गोली बाएं पैर के मध्य भाग में पीछे की ओर से लगी थी।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि चार गोलियां शरीर को आर-पार करके निकल गईं। पोस्टमार्टम के दौरान एक गोली शरीर के अंदर मिली जिसे सुरक्षित रख लिया गया है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में मुठभेड़ के बाद गंभीर रूप से घायल भरत तिवारी को पीएमसीएच भेजा गया था जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उसी रात दंडाधिकारी की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया गया।
पुलिस और परिवार के दावे अलग
17 जून 2026 को जिला पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने बिलौटी गांव में छापेमारी की। पुलिस के अनुसार भरत तिवारी हथियारबंद थे और मुठभेड़ के दौरान उनकी ओर से 10 से 15 राउंड फायरिंग हुई। पुलिस की ओर से एसटीएफ के एक जवान ने चार राउंड और तत्कालीन थानाध्यक्ष ने अपनी सर्विस पिस्टल से एक राउंड फायर किया। मुठभेड़ में पुलिस का कोई जवान घायल नहीं हुआ। घटनास्थल से एक लोडेड पिस्टल, एक मैगजीन, दो जिंदा कारतूस और दो खोखे बरामद किए गए।
परिवार और गांव वालों का आरोप बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था और उसके बाद उन्हें गोली मारी गई। परिवार का दावा है कि यह घटना एक फेसबुक लाइव वीडियो में भी दिखी। भरत तिवारी सोशल मीडिया पर नदी कटाव, भ्रष्टाचार और स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय रूप से आवाज उठाते थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पांच गोलियों की पुष्टि के बाद पुलिस एनकाउंटर पर सवाल और तेज हो गए हैं।
दो मुकदमे, DIG करेंगे जांच
मुठभेड़ के बाद मृतक की मां आशा देवी ने शाहपुर थाने में तत्कालीन जगदीशपुर SDPO, तत्कालीन थानाध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई। इस मामले में कुल दो अलग-अलग FIR दर्ज हुई हैं। दोनों की जांच और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी शाहाबाद के DIG को सौंपी गई है।
प्रशासनिक स्तर पर भी कदम उठाए गए। परिवार की शिकायत के बाद SDPO को उनके पद से हटाया जा चुका है। FIR में परिवार के नाम भी हटाए गए। इस मामले को लेकर क्षेत्र में महापंचायत भी हुई और विपक्ष लगातार सरकार पर निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर हमलावर है।
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30 दिन में कार्रवाई नहीं — सीधा निलंबन
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम में भोजपुर घटना पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने ऐलान किया कि मामले में तत्काल उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग का गठन किया गया है जिसकी अगुवाई एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे।
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा, “जब भी कोई गंभीर समस्या सामने आती है तो सरकार तत्परता से संज्ञान लेती है। भोजपुर में हुई घटना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए बिहार सरकार ने उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग गठित किया है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
CM ने प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी आवेदन पर 30 दिनों के भीतर आदेश जारी नहीं होता तो 31वें दिन संबंधित अधिकारी को सीधे निलंबित करने का आदेश मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी किया जाएगा। सरकार की प्राथमिकता है कि लोगों को समय पर न्याय और प्रशासनिक राहत मिले।


