अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को हुई अहम बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिए गए। बैठक में ट्रस्ट का लगभग पूरा कोरम मौजूद रहा। दानपात्रों से चढ़ावे की चोरी के मामले में एसआईटी जांच जारी है और ट्रस्ट ने साफ कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
यह भी पढ़ें: भाजपा की यूपी में तैयारी शुरू
चंपत राय और अनिल मिश्रा की विदाई
बैठक शुरू होने से पहले ही यह तय हो गया था कि चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा इसमें शामिल नहीं होंगे। सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने स्पष्ट कर दिया था कि इन दोनों की मौजूदगी में वे बैठक का हिस्सा नहीं बनेंगे। इसी के बाद दोनों को बैठक से दूर रखने का फैसला किया गया। मंदिर व्यवस्था से जुड़े गोपाल राव को भी बैठक में शामिल नहीं होने दिया गया। बैठक में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास और ट्रस्ट का संविधान तैयार करने वाले 99 वर्षीय वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन उपस्थित रहे। कुछ सदस्यों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़कर कोरम पूरा किया।
बैठक में इस्तीफों पर विस्तार से चर्चा हुई। के. परासरन ने ट्रस्ट के संविधान का हवाला देते हुए बताया कि इस्तीफा देते ही वह स्वतः प्रभावी हो जाता है — ट्रस्ट के पास इसे अस्वीकार करने का कोई प्रावधान ही नहीं है। इसके बाद दोनों के इस्तीफे सर्वसम्मति से मंजूर कर लिए गए। ट्रस्ट ने चंपत राय के वर्षों के योगदान को स्वीकार करते हुए राम मंदिर निर्माण में उनकी भूमिका का सम्मान किया।
कृष्ण मोहन को अंतरिम जिम्मेदारी
चंपत राय के जाने के बाद मंदिर की व्यवस्थाएं संभालने की जिम्मेदारी अंतरिम रूप से कृष्ण मोहन को दी गई है। उन्हें नई टीम गठित कर सभी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करने का काम सौंपा गया है।
इसी बैठक में ट्रस्ट ने उन खबरों का सीधा खंडन किया जिनमें मंदिर से अन्य कीमती वस्तुओं के गायब होने का दावा किया जा रहा था। ट्रस्ट ने कहा कि मंदिर में भेंट स्वरूप प्राप्त करीब 2,800 प्रकार की सामग्रियों का पूरा रजिस्टर सुरक्षित है और सभी वस्तुएं अपनी-अपनी जगह मौजूद हैं। जरूरत पड़ने पर इस रिकॉर्ड को सार्वजनिक किया जाएगा।
ट्रस्ट ने यह भी कहा कि दानपात्रों से चढ़ावे की चोरी 500 वर्षों के संघर्ष और करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़े मंदिर के लिए अत्यंत पीड़ादायक घटना है। दोषियों को किसी भी हाल में नहीं बख्शा जाएगा और एसआईटी निष्पक्ष जांच करके कठोर दंड दिलाएगी।
22 जुलाई को अगली बैठक
भविष्य में मंदिर की व्यवस्थाओं को और पारदर्शी बनाने के लिए बैठक में एक छोटी समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को तय हुई है। इसमें एसआईटी जांच रिपोर्ट की प्रगति की समीक्षा होगी, नए ट्रस्टियों की नियुक्ति पर विचार किया जाएगा और अन्य लंबित विषयों पर अंतिम फैसले लिए जाएंगे।
ट्रस्ट ने साथ ही यह भी आगाह किया कि कुछ तत्व इस घटना की आड़ में राम मंदिर और रामभक्तों की छवि बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी किसी भी अफवाह या भ्रामक प्रचार से दूर रहने की अपील की गई।
यह भी पढ़ें: यूपी में उच्च शिक्षा का हुआ विस्तार
जांच पूरी होने तक कोई दोषी नहीं
ट्रस्ट की बैठक के बाद विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने भी अपनी बात रखी। वीएचपी के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि ट्रस्ट जो भी फैसला लेगा उसका सम्मान किया जाएगा। संगठन का ट्रस्ट से जुड़े संतों के विवेक पर पूरा भरोसा है।
चंपत राय के बचाव में जैन ने कहा कि महज आरोप लगने से कोई दोषी नहीं हो जाता — जांच एजेंसी को अपना काम पूरा करने दिया जाए। उन्होंने दावा किया कि चंपत राय के खिलाफ लगाए गए कई आरोप जांच में टिक नहीं पाए और उन्होंने एसआईटी गठन का समर्थन करते हुए पूरा सहयोग दिया है। जैन ने यह भी कहा कि प्रारंभिक जानकारी सामने आने के तुरंत बाद ट्रस्ट ने प्राथमिकी दर्ज कराई — किसी को बचाने की कोशिश नहीं हुई।


