गाज़ीपुर। सोमवार को जनपद की सातों तहसीलों में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया। जहां राजस्व, पुलिस और विकास से जुड़ी समस्याएं लेकर 613 फरियादी पहुंचे, लेकिन मौके पर सिर्फ 55 शिकायतों का निस्तारण हो सका। बाकी 558 मामले संबंधित विभागों को भेज दिए गए। मुख्य आयोजन तहसील सैदपुर में हुई जिसकी अध्यक्षता प्रभारी जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद ने की।
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तहसीलों में शिकायतों का हाल
जनपद की सातों तहसीलों में पहुंचे फरियादियों की संख्या और मौके पर हुए निस्तारण के बीच का फासला साफ दिखा। सबसे ज्यादा शिकायतें सैदपुर में आईं — 139 फरियादी पहुंचे लेकिन मौके पर महज 6 मामले सुलझे। दूसरे नंबर पर जखनियां रहा जहां 123 शिकायतें दर्ज हुईं और 12 का निस्तारण हुआ। मुहम्मदाबाद में 109 शिकायतें आईं जिनमें 19 का मौके पर समाधान हो सका — यह अनुपात सातों तहसीलों में सबसे बेहतर रहा।
कासिमाबाद में 73 फरियादी पहुंचे, 4 मामले हल हुए। सेवराई में 59 शिकायतें आईं, 4 का निस्तारण हुआ। सदर तहसील में 57 फरियादी पहुंचे और 5 मामले सुलझे। जमानियां में सबसे कम 53 शिकायतें दर्ज हुईं जिनमें से 5 का मौके पर समाधान किया गया।
कुल मिलाकर जनपद भर में आई 613 शिकायतों में से 558 मामले अभी भी विभागों की फाइलों में हैं। इनका निस्तारण कितने समय में होगा, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।
सीडीओ ने दिए सख्त निर्देश
सैदपुर तहसील सभागार में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद ने फरियादियों की शिकायतें सुनीं। कुछ मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश देकर समाधान कराया गया। बाकी शिकायतें संबंधित विभागों को अग्रसारित की गईं।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कोई भी शिकायत अनावश्यक रूप से लंबित न रखी जाए। पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों को भूमि विवाद और आपसी झगड़ों से जुड़े मामलों में मिलकर काम करने को कहा गया ताकि फरियादियों को जल्द न्याय मिल सके। सीडीओ ने स्पष्ट किया कि शिकायतों का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी तरीके से होना चाहिए।
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अधिकारी मौजूद, जांच आगे जारी
कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक नगर, उपजिलाधिकारी सैदपुर, जिला विकास अधिकारी, तहसीलदार सैदपुर और स्वास्थ्य विभाग समेत कई अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने अपने-अपने विभाग से जुड़ी शिकायतें सुनीं और आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया।
समाधान दिवस का मकसद जनता की समस्याओं का त्वरित हल निकालना है। लेकिन इस बार के आंकड़े बताते हैं कि हर नौ में से आठ फरियादी बिना तत्काल राहत के लौटे। जिन 558 मामलों को विभागों को भेजा गया है, उनका समयबद्ध निस्तारण होता है या नहीं — यही इस व्यवस्था की असली परीक्षा होगी।

