📌 अमित मणि त्रिपाठी
देवरिया। सोमवार को सदर तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस का कार्यक्रम चल रहा था। जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी वहां पहुंचे और मौजूद अधिकारियों को फौरन एक अलग जिम्मेदारी सौंप दी — विकास खंड देवरिया सदर के बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों की अचानक जांच। 75 अधिकारियों को दो-दो विद्यालय आवंटित किए गए और वे तुरंत रवाना हो गए। देखते ही देखते 153 सरकारी विद्यालयों में एक साथ निरीक्षण शुरू हो गया।
एक साथ 153 स्कूलों में जांच
इस पैमाने की जांच जनपद में कम ही होती है। एक ही दिन में 75 अधिकारी, 153 स्कूल और चेकलिस्ट के आधार पर बिंदुवार निरीक्षण — इसकी योजना पहले से बनी थी या मौके पर ही तय हुई, यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन यह जरूर है कि अधिकारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के स्कूलों की तरफ रवाना किया गया।
जांच के दायरे में केवल बच्चों की उपस्थिति नहीं थी। हर अधिकारी को एक लंबी चेकलिस्ट थमाई गई जिसमें भौतिक संसाधनों की स्थिति, शिक्षण गुणवत्ता, बच्चों का अधिगम स्तर, निपुणता स्थिति, पाठ्यपुस्तक वितरण, मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था, शिक्षक संदर्शिका का इस्तेमाल, छात्रों और शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति, निपुण तालिका का आच्छादन, विद्युत व्यवस्था और ऑपरेशन कायाकल्प के कामों की वास्तविक स्थिति सब शामिल था।
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शिक्षकों का उत्साह बढ़ाना मकसद
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को रवाना करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि इस जांच का मकसद शिक्षकों पर दबाव डालना नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्कूल पहुंचकर शिक्षकों में सकारात्मक सोच विकसित करें, उन्हें पढ़ाने के काम के प्रति प्रोत्साहित करें और उनका आत्मविश्वास बढ़ाएं। जहां कमियां दिखें, वहां सुधार की दिशा में मार्गदर्शन करें।
यह निर्देश इसलिए भी अहम है क्योंकि बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों पर अक्सर शिकायत रहती है कि वे समय पर नहीं पहुंचते या पढ़ाई पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। डीएम ने साफ कहा कि शिक्षक समय से विद्यालय पहुंचें और पठन-पाठन की व्यवस्था सुदृढ़ रखें। शासन द्वारा स्वीकृत सभी सुविधाएं बच्चों तक पहुंचनी चाहिए।
शिक्षित बच्चे सबसे बड़ी पूंजी
निरीक्षण दल रवाना करने के बाद डीएम हुल्गी ने कहा, “किसी भी देश, समाज और परिवार की सबसे बड़ी पूंजी शिक्षित बच्चे होते हैं।” उन्होंने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सभी अधिकारियों और शिक्षकों की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने शिक्षा विभाग से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि जनपद को शिक्षा के क्षेत्र में निपुण बनाने में अपना पूरा योगदान दें। समाधान दिवस के बीच यह अचानक निरीक्षण अभियान इस बात का संकेत है कि डीएम शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत खुद परखना चाहते हैं।

