लखनऊ। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के अपने पहले औपचारिक संगठनात्मक दौरे में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों की जमीन टटोली। उन्होंने मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्रियों, सांसदों, विधायकों और पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों से अलग-अलग मुलाकात की। नवीन यूपी पहले भी आ चुके हैं लेकिन यह उनका पहला औपचारिक सियासी दौरा था जिसमें संगठन की ताकत और सत्ता के साथ तालमेल दोनों को परखने की कोशिश की गई।
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एकजुटता का संदेश दिया
हवाई अड्डे पर नितिन नवीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही एक गाड़ी में बैठकर बाहर निकले। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान केंद्र और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच तालमेल को लेकर जो अटकलें उठी थीं, उन्हें देखते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस कदम से एकजुटता का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की। योगी को अस्थिर करने की अटकलों को 2024 में इन्हीं अफवाहों ने बल दिया था, इसीलिए नवीन ने दोनों के बीच समन्वय को सार्वजनिक रूप से रेखांकित करने का प्रयास किया।
पार्टी मुख्यालय तक पहुंचने के दौरान जाति और वर्ग के प्रतिनिधियों ने अलग-अलग जगहों पर नवीन का स्वागत किया। इस रूपरेखा से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि ब्राह्मणों समेत किसी भी वर्ग में पार्टी को लेकर कोई नाराजगी नहीं है। नवनियुक्त प्रदेश पदाधिकारियों से बातचीत और पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ अलग बैठक से साफ हुआ कि नवीन ने सत्ता और संगठन के बीच किसी भी दरार को बंद करने की पहल की है। उनके स्वागत में उमड़ी भीड़ ने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया और आम लोगों को यह संदेश दिया कि अटकलों के बावजूद पार्टी का संगठन एकजुट और सक्रिय है।
2027 की चुनौती
इस दौरे की असल पृष्ठभूमि 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों में है। उन चुनावों में भाजपा प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 162 पर बढ़त बना सकी थी। 2027 में बहुमत के लिए कम से कम 202 सीटें जीतनी होंगी। इसके अलावा 2024 में विपक्ष के संविधान बदलने और आरक्षण समाप्त करने के प्रचार ने भी पार्टी को नुकसान पहुंचाया था। नवीन ने इस दौरे में यह जानने की कोशिश की कि उन सीटों पर अब तक क्या सुधार हुए हैं जहां 2024 में नुकसान उठाना पड़ा था और कितने और बदलाव की जरूरत है।
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आगे की रणनीति
2017 और 2022 में लगातार दो बार जीत के बाद 2027 में हैट्रिक बनाना पार्टी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। नितिन नवीन का यह दौरा उसी दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक आने वाले महीनों में और संगठनात्मक बैठकें होंगी ताकि जमीनी स्तर पर तैयारी मजबूत की जा सके। नवीन ने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन को चुनावी मोड में लाने के लिए हर स्तर पर बैठकें और समीक्षाएं होती रहेंगी। विपक्ष के उन मुद्दों का जवाब तैयार करना भी इस रणनीति का हिस्सा होगा जो 2024 में पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हुए थे।



